संतकबीरनगर। बखिरा थाना क्षेत्र के जिवधरा गांव में मिले युवती के शव की तीन साल बाद भी शिनाख्त नहीं हो पाई। तीन साल से मामले की विवेचना चल रही है। अब तक छह विवेचक केस की विवेचना कर चुके हैं और चार विवेचकों को विवेचना में लापरवाही पर बैड इंट्री भी मिल चुकी है।
जिवधरा गांव में 30 अगस्त 2021 को बोरे में अज्ञात युवती का शव मिला था। जानकारी होने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजवाया। युवती का उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच आंका गया था। पुलिस ने मामले में प्रधान की तहरीर पर केस दर्जकर विवेचना शुरू की। मृतका के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का वजह एंटी मार्टम हैगिंग पाया गया। पुलिस जांच के दौरान मेंहदावल थाना क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने युवती के शरीर पर मिले कपड़े से उसकी पहचान अपनी बेटी के रूप में किया और उसके सात माह गर्भवती होने का रिपोर्ट प्रस्तुत किया और बाद में वह मुकर गया।
केस की विवेचना सबसे पहले एसओ बखिरा रहे चंदन कुमार ने शुरू की। बाद में केस की विवेचना एसओ विजय नारायन प्रसाद, इंस्पेक्टर अनिल कुमार और इंस्पेक्टर अनिल कुमार सिंह ने की। इसके बाद भी शव का पहचान नहीं हो पाया।
एसपी की तरफ से जब केस के विवेचना की समीक्षा की गई तो सभी को प्रतिकूल प्रवृष्टि दिया गया। बाद में विवेचना का जिम्मा इंस्पेक्टर अनुज सिंह को मिला और कुछ समय बाद उनका स्थानांतरण गैर जनपद के लिए हो गया। अब इस केस की विवेचना इंस्पेक्टर पंकज कुमार पांडेय के जिम्मे है और अभी तक शव का शिनाख्त नहीं हो पाया है।
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