संतकबीरनगर। बघौली ब्लॉक के उतरावल में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक आचार्य धरणीधर महाराज ने कहा कि मनुष्य स्वयं को भगवान बनने के बजाय प्रभु का दास बनने का प्रयास करें, क्योंकि भक्ति भाव देख कर जब प्रभु में वात्सल्य जागता है तो वे सब कुछ छोड़कर अपने भक्त के पास दौड़े चले आते हैं। गृहस्थ जीवन में मनुष्य तनाव में जीता है, जबकि संत सद्भाव में जीता है। यदि संत नहीं बन सकते तो संतोषी बन जाओ। संतोष सबसे बड़ा धन है।
आचार्य धरणीधर ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का सात दिनों तक श्रवण करने से जीव का उद्धार हो जाता है। हमेशा धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए, कर्म करो लेकिन, फल की इच्छा मत करो। भगवान हमेशा सच्चे भक्तों में ही वास करते है। सुदामा चरित्र का व्याख्यान करते हुए कहा कि संसार में मित्रता भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की तरह होनी चाहिए। जिनकी कथा में सच्ची मित्रता दर्शाई गई है। आधुनिक युग में स्वार्थ के लिए लोग एक दूसरे के साथ मित्रता करते हैं और काम निकल जाने पर लोग एक दूसरे को भूल जाते हैं। जीवन में प्रत्येक प्राणी को परमात्मा से एक रिश्ता जरूर बनाना चाहिए। भगवान से बनाया गया वह रिश्ता जीव को मोक्ष की ओर ले जाएगा। सुदामा ने विपरीत परिस्थितियों में अपने सखा कृष्ण का चिंतन और स्मरण नहीं छोड़ा। इस अवसर पर बेचन प्रजापति, चंद्रिका प्रजापति, राम केवल प्रजापति, शेषनाथ पाण्डेय, सुभाष चंद्र पाण्डेय, राधेश्याम राय, सुरेंद्रनाथ राय, नरेंद्र नाथ राय, बुझारत राय, सोनू प्रजापति, शिव जन्म प्रजापति आदि मौजूद रहे।