संवाद न्यूज एजेंसी
हरिहरपुर। रसोई गैस की किल्लत के चलते गांवों में लोग परेशान हैं। कुछ जगहों पर लोगों ने भोजन पकाने के लिए घरों में मिट्टी के चूल्हे बनाने शुरू कर दिए हैं। ताकि गैस न मिलने पर चूल्हे पर भोजन पकाया जा सके।
करीब दो दशक पहले गांव के करीब हर घर में खाना पकाने के लिए मिट्टी के चूल्हे होते थे। धीरे-धीरे गैस की उपलब्धता बढ़ी तो लोग गैस का कनेक्शन लेने लगे। अब अमेरिका और ईरान के बीच हुए जंग के हालात में पेट्रोल-डीजल और गैस की किल्लत बढ़ गई है।
क्षेत्र के अनिमेष पांडेय, हनुमान पटेल, दीपेंद्र पटेल, अशोक कुमार ने बताया कि एजेंसियों पर गैस की कमी के चलते लोगों को रसोई गैस मिलने में दिक्कत हो रही है। गैस न मिलने पर गांव की महिलाएं अब मिट्टी के चूल्हे बना रही हैं।
क्षेत्र के अनिल कुमार, राम सेवक, चंद्भूषण, अमित कुमार ने बताया कि गैस की ओटीपी देने के चार से पांच दिन बाद गैस की डिलेवरी हो रही है ऐसे में गैस खत्म हो जाने से परिवार की महिलाएं मिट्टी के चूल्हे पर खाना पकाने पर विवश हैं।
गैस की किल्लत को देखते हुए महिलाएं अब मिट्टी के चूल्हे बनाने लगी हैं, जिससे परिवार के भोजन की व्यवस्था हो सके। लोगों ने बताया कि गैस चूल्हे के चलते घरों से मिट्टी के चूल्हे गायब हो गए हैं लेकिन ऐसे ही हालात रहे तो भोजन पकाने के लिए और कोई विकल्प नहीं दिख रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब लकड़ी के लिए पेड़ भी काफी कम हो गए हैं। बाजार में लकड़ी नौ रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही है। लकड़ी खरीदकर खाना पकाना भी मंहगा होगा।