संतकबीरनगर। शहर और ग्रामीण इलाकों में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। जनवरी के 13 दिन में कुत्तों के हमले में जिले में 1050 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं, वहीं बंदरों ने भी 80 लोगों को अपना शिकार बनाया है। उनमें बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हैं। इसके बावजूद आवारा कुत्तों को पकड़ने और नियंत्रित करने की प्रशासनिक पहल केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब उम्मीद जगी है कि इससे लोगों को निजात मिलेगी।
शहर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। आए दिन लोग कुत्तों का शिकार बन रहे हैं, लेकिन नगर पालिका हाथ पर हाथ धरे बैठी है। उसके पास कुत्तों को पकड़ने की कोई योजना नहीं है। शहर के शास्त्री नगर, टीचर्स काॅलोनी, शुगर मिल चौराहा आदि जगहों पर कुत्तों का आतंक है। यहां पर एक गली में पिछले सप्ताह तीन दिन में पांच लोगों को कुत्तों ने काटा है। शहर में कुत्तों के काटने के मामले निरंतर बढ़ते जा रहे हैं।
इसी तरह महुली में मंगलवार को कुत्तों ने तीन लाेगों को काट लिया था। वे वैक्सीन लगवाने जिला अस्पताल आए थे। बघौली के दो लोग जिला अस्पताल वैक्सीन लगवाने पहुंचे थे। सीएचसी खलीलाबाद में बुधवार को 30 लोगों ने एंटी रैबिज वैक्सीन लगवाई। इधर, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अगर कुत्ते के काटने से किसी की मौत होती है तो उसका मुआवजा सरकार व निकाय को देना होगा। कुत्तों को सड़कों से हटाया जाए। लेकिन, नगर पालिका के पास अभी तक शेल्टर होम के लिए जगह उपलब्ध नहीं हुई है। इस ओर नगर पालिका कोई भी ठोस कदम नहीं उठा पाई है। ईओ अवधेश भारती ने बताया कि शेल्टर होम के लिए अभी कोई योजना नहीं है। जैसा आदेश आएगा उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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ठंड में हमलावर हो जाते हैं कुत्ते
भीषण ठंड के बीच कुत्ते भी हमलावर हो चुके हैं। जनवरी 2025 में धनघटा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में कुत्तों का आतंक है। चार दिनों में कुत्तों के काटने से 180 लोग घायल हो चुके हैं। जनवरी में कुत्ते ज्यादा हमलावर हो गए हैं। विभिन्न गांवों में कुत्ते 180 लोगों पर हमला करके घायल कर चुके हैं। वहीं बभनौली में बंदर ने तीन लोगों काट लिया था। सभी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैंसर में एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया गया था।
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सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सराहनीय
मुखलिसपुर इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य हीरालाल त्रिपाठी, एचआर इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य राम कुमार सिंह, एचआरपीजी काॅलेज के प्रोफेसर डीएन पांडेय आदि ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी स्वागत योग्य है। सड़कों पर घूमने वाले आवारा कुत्तों के लिए सरकार को व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे लोग उसका शिकार न हाें। इसका समुचित प्रबंध होना चाहिए।
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कुत्ता, सियार, बिल्ली, बंदर अगर किसी को काट लेते हैं तो उसे एंटी रैबीज जरूर लगवाना चाहिए। यह 24 घंटे के अंदर लगवा लेना चाहिए। इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि जिस कुत्ते ने काटा है, वह किस नस्ल का है और उसे एंटी रैबीज लगी है या नहीं। -डॉ. एपी मिश्र, फिजिशियन जिला अस्पताल
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रैबीज न लगवाने पर 90 दिन बाद दिखता है असर
अगर किसी व्यक्ति को कुत्ते ने काट लिया है और उसने एंटी रैबीज नहीं लगवाई है तो कुत्ता काटने का असर 90 दिन बाद दिखता है। इसमें आदमी पागल की तरह बर्ताव करने लगता है। डाॅ. एपी मिश्र ने बताया कि एंटी रैबीज न लगवाने पर 90 दिन बाद व्यक्ति पर कुत्ता काटने का असर दिखना शुरू हो जाता है। वह कुत्ते जैसी आवाज भी निकालने लगता है। असहनीय पीड़ा होती है और व्यक्ति की कुछ दिन बाद ही मौत हो जाती है।
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पालतू कुत्ते का जरूर कराएं वैक्सीनेशन
अगर आप कुत्ता पाल रहे हैं तो उसका वैक्सीनेशन जरूर कराएं। पशु पालन विभाग में कुत्ते का रैबीज की डोज लगाई जाती है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुरेश तिवारी ने बताया कि जिले के सभी पशु अस्पताल में कुत्ते को रैबीज लगाया जाता है। जो लोग कुत्ते पाल रखे हैं वह रैबीज जरूर लगवा लें। कुत्ते के पैदा होने के छह माह बाद ही रैबीज लगवा लेना चाहिए। अलग-अलग प्रकार के टीके कुत्ते को लगाए जाते हैं।
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कटखने कुत्ते की कैसे करें पहचान
अगर कोई पागल कुत्ता किसी को काटता है तो उसकी पहचान जरूरी है। पागल कुत्ते के सिर से अगर पस टपक रहा है और वह कुत्ता सिर नीचे कर भाग रहा है तो उससे बच कर रहें। वह किसी को भी काट सकता है। डॉ. एपी मिश्र ने बताया कि कुत्ते के सिर में चोट लगी है और वह स्थान पूरी तरह से सड़ गया है तो इसका असर कुत्ते के मस्तिष्क पर पड़ता है। कुत्ता पागल हो जाता है और वह किसी को भी काट सकता है।
सीएचसी खलीलाबाद के सामने बैठा कुत्ता-संवाद
सीएचसी खलीलाबाद के सामने बैठा कुत्ता-संवाद
सीएचसी खलीलाबाद के सामने बैठा कुत्ता-संवाद