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Sant Kabir Nagar News: मदरसा सील होने के बाद कंप्यूटर शिक्षा के नाम पर दो शिक्षक लेते रहे वेतन

Thu, 15 Jan 2026 01:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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संतकबीरनगर। खलीलाबाद शहर की गोश्तमंडी रोड स्थिति ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान के सोसाइटी कुल्लियातुल बनातिर रजविया व रजा फाउंडेशन के साथ ही कंप्यूटर शिक्षा के लिए अल हुदा गर्ल्स कंप्यूटर इंस्टीट्यूट की भी मान्यता ली गई थी। मिनिस्ट्री आफ इलेक्ट्रानिक एंड इनफार्मेशन टेक्नालॉजी भारत सरकार के अधीन चल रही इस संस्था के जरिए दो शिक्षकों का वेतन जारी हो रहा था। जूनियर फैकल्टी में अफरोज अहमद और सीनियर में नसरीन जहां के नाम हर माह वेतन आता था। जबकि 12 फरवरी 2024 को डीएम कोर्ट ने मदरसे की जमीन को पूर्ण रूप से जब्त कर सरकार के खाते में निहित करने का आदेश दिया था।
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इसका खुलासा आरटीआई के तहत राष्ट्रीय इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान चंडीगढ़ से हुआ है। जानकारों का कहना है कि अभी तक इन शिक्षकों के वेतन पर रोक नहीं लगाई जा सकी है।
शहर के ब्रिटिश मौलाना के पंजीकृत सोसाइटी कुल्लियातुल बनातिर रजविया व रजा फाउंडेशन के माध्यम से अलहुदा कंप्यूटर इंस्टीच्यूट- सीएबीए-एमडीटीपी-सेंटर 250170 की मान्यता भी लिया गया था। इसकी मान्यता नेशनल काउंसिल फाॅर प्रोमोशन ऑफ ऊर्दू लैंग्वेज व राष्ट्रीय इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान से प्राप्त थी। जानकारी के अनुसार, यह संस्था भारत सरकार की देखरेख में चलती है। कंप्यूटर इंस्टीट्यूट संचालन के लिए अल हुदा गर्ल्स कंप्यूटर इंस्टीट्यूट में अफरोज अहमद व नसरीन जहां को शिक्षक के रूप में रखा गया था। सीनियर फैकल्टी शिक्षक के लिए 21,995 रुपये व जूनियर फैकल्टी शिक्षक के लिए 20,212 रुपये प्रतिमाह वेतन जारी हो रहा था।
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ब्रिटिश मौलाना की बहू और साले का बेटा हैं शिक्षक
अल हुदा गर्ल्स कंप्यूटर इंस्टीट्यूट में मौलाना की बहू व साले का पुत्र शिक्षक के रूप में तैनात हैं। नसरीन जहां ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान की बहू हैं। वहीं, बतौर शिक्षक कार्यरत अफरोज अहमद मौलाना के साले का बेटा बताया जा रहा है। जबकि राष्ट्रीय इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान चंडीगढ़ से मिली जानकारी के अनुसार, मौलाना का बेटा तौसीफ खान अभिलेखों में बतौर केंद्र प्रभारी दर्शाया गया है।
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मदरसा सील होने के बाद दूसरी बिल्डिंग में 17 माह संचालित रहा सेंटर
ब्रिटिश मौलाना का मदरसा सील होने के बाद 17 माह तक मदरसा सील भवन से सटे अन्य भवन में संचालित होता रहा। कंप्यूटर सेंटर का भी संचालन नहीं रूका। इधर, लगभग दो साल के भीतर कंप्यूटर शिक्षक के वेतन के रूप में लाखों रुपये मौलाना के परिवार में आते रहे। इस पर अब भी लगाम नहीं लग पाई है। शिकायतकर्ता नुरूल हक खान ने उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर इस पर रोक लगाने की मांग की है।
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अल्प संख्यक कल्याण विभाग की तरफ से मदरसा कुल्लियातुल बनातिर रजविया के लिए किसी तरह का अनुदान नहीं दिया जा रहा था और न ही किसी शिक्षक की तैनाती थी। मदरसे का मान्यता निलंबित कर दी गई है। -प्रवीन कुमार मिश्र, डीएमओ
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