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Sant Kabir Nagar News: चोरी के जेवरात खरीदने के शक में उठाए गए चार सराफा कारोबारी

Sun, 07 Sep 2025 11:52 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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बखिरा। गोरखपुर जिले के खजनी क्षेत्र में हुए चोरी के मामले में सोने के जेवरात खरीदने के शक में खजनी पुलिस और क्राइम ब्रांच गोरखपुर की टीम बखिरा कस्बे से सराफा कारोबारी पिता-पुत्र समेत चार कारोबारियों को शनिवार की शाम उठा ले गई। रविवार को भी पुलिस उनसे पूछताछ करती रही। इस कार्रवाई से कस्बे के कारोबारियों और व्यापार मंडल में आक्रोश है।
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मिली जानकारी के अनुसार, विगत कुछ महीनों से खजनी क्षेत्र में चोरी की कई घटनाएं हो चुकी हैं। इन चोरियों के खुलासे के लिए पुलिस दबिश देकर कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों की निशानदेही पर शनिवार की शाम को बखिरा कस्बे में क्राइम ब्रांच गोरखपुर की टीम व खजनी थाने की संयुक्त टीम पहुंची। इसके बाद सर्राफा कारोबारी पिता-पुत्र और एक कारोबारी को नन्दौर कस्बे से हिरासत में लिया।
बताया जा रहा है कि मेंहदावल कस्बे से भी एक सर्राफा कारोबारी को टीम अपने साथ ले गई है। इस घटना के बाद से कस्बे में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गईं। फिलहाल खजनी पुलिस व क्राइम ब्रांच की टीम देर रात तक हिरासत में लिए सर्राफा कारोबारियों से पूछताछ करती रही। देर रात तक पुलिस ने बखिरा क्षेत्र के किसी भी कारोबारी को हिरासत से मुक्त नहीं किया है।
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पुलिस टीम कारोबारी पर चोरी के सामान खरीदने का आरोप मढ़ रही है, जबकि हिरासत में लिए गए कारोबारी किसी भी तरह के जेवरात की खरीदारी से इंकार कर रहे हैं। बहरहाल व्यापार मंडल खलीलाबाद, बखिरा व गोरखपुर के कुछ सर्राफा कारोबारी पकड़े गए लोगों को पुलिस हिरासत से छुड़ाने के लिए प्रयास कर चुकी है, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है। खजनी पुलिस अपने दावे पर अडिग है। बहरहाल हिरासत में लिए गए सभी सर्राफा कारोबारियों को खजनी पुलिस ने भीड़ से बचने के लिए अलग-अलग थानों पर भेज दिया है।

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पुराने जेवरात खरीदने के लिए नियम के निर्धारण की मांग बखिरा। बखिरा कस्बे से जिस तरह से सराफा कारोबारी को क्राइम ब्रांच ले गई है। इससे सराफा कारोबारियों में दहशत का माहौल है। दुकानदार पुराने जेवरात खरीद करने से डरने लगे हैं। कस्बे के सराफा कारोबारियों ने पुराने जेवरों को खरीदने के लिए पुलिस व प्रशासन से कोई नियम निर्धारण की मांग की है। कारोबारी मोहित, वीरेंद्र, रामचंद्र व दिलीप ने बताया कि वह लोग नए जेवर की बिक्री के साथ ही ग्राहक द्वारा लाए गए पुराने जेवर की भी खरीद करते हैं। इन पुराने जेवरों पर ऐसा कोई चिह्न या निशान नहीं होता है कि उनकी पहचान की जा सके। पुराने जेवर की बिक्री करने वाले की भी कोई पहचान नहीं होती है। लाए गए पुराने जेवर चोरी के हैं या नहीं यह कह पाना बहुत मुश्किल होता है। वह लोग ग्राहक की जरूरत व मजबूरी को समझते हुए पुराने जेवर खरीदते हैं। यदि पुलिस व प्रशासन पुराने जेवर खरीदने पर रोक लगा दे तो वह लोग नहीं खरीदेंगे। अन्यथा प्रशासन इसके लिए कोई मानक तय कर दे। यदि ऐसा नहीं होता है तो इन अपमानजनक घटनाओं की वजह से सराफा का कारोबार ही बंद हो सकता है।
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