केले की खेती के लिए ढूंढे नहीं मिल रहे किसान
जिले में 50 हेक्टेयर में केले की खेती का है लक्ष्य, अब तक मात्र आठ हेक्टेयर में हुई खेती
प्रति हेक्टेयर 30,738 रुपये मिलता है अनुदान
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। एकीकृत विकास मिशन के तहत जिले में 50 हेक्टेयर में केले की खेती का लक्ष्य तय किया गया है। इस योजना में किसानों को अनुदान देने का भी प्रावधान है। इसके बाद भी केले की खेती के लिए किसान ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। इसको लेकर उद्यान विभाग के अधिकारी-कर्मचारी परेशान हैं। अब इसके लिए जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसके बावजूद अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है।
किसानों की आय दो गुना करने की मुहिम में सरकार जुटी है। ऐसे में पारंपरिक खेती के अलावा अन्य उत्पादों से किसानों को जोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। इसी मुहिम के तहत जिले में एकीकृत विकास मिशन के तहत 50 हेक्टेयर में केले की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें सामान्य व पिछड़ा वर्ग के साथ ही अनुसूचित जाति के लिए भी 20 हेक्टेयर में केले की खेती की जानी है। सरकार इसके लिए प्रति हेक्टेयर 30,738 रुपये का अनुदान दे रही है। इसके अलावा मेेेंटेनेंस के लिए 10247 रुपये अलग से दिए जाने का प्रावधान है। वैसे केले का एक पौधा 17 रुपये के करीब पड़ता है, लेकिन विभाग की तरफ से 9.96 रुपये में ही पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके बाद भी केले की खेती के प्रति किसानों में रुझान नहीं पैदा हो रहा है। इतनी सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के बावजूद जिले में अब तक आठ हेक्टेयर में ही केले की खेती हो सकी है। अभी 15 अगस्त तक केले की खेती का सीजन है। विभाग उम्मीद लगाए हुए है कि 10 हेक्टेयर में और केले की खेती हो सकती है। ऐसे में विभाग लक्ष्य के आसपास भी नहीं पहुंच पाएगा।
जिला उद्यान अधिकारी संतोष कुमार दूबे ने कहा कि केले की खेती कर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। इसके लिए सरकार व विभाग हर संभव मदद कर रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को जानकारी देकर केले की खेती के प्रति जागरूक किया जा रहा है, ताकि लक्ष्य हासिल हो सके।