उपनिबंधक कार्यालय खलीलाबाद जहां होती है संपत्ति की रजिस्ट्री।
संतकबीरनगर। निबंधन कार्यालय में अब ओटीपी आधारित रजिस्ट्री शुरू होने से जमीनों की बिक्री में फर्जीवाड़ा कर पाना आसान नहीं होगा। इससे फर्जीवाड़े पर नकेल कसेगी और कूट रचित खतौनी तैयार करके जमीनों को नहीं बेचा जा सकेगा।
खासकर, असंक्रमणीय भूमि (जिसे बेचा या दान नहीं दे सकते) की रजिस्ट्री अब नहीं हो पाएगी। अगर कोई कूट रचित खतौनी तैयार कर आवेदन करेगा तो नया साॅफ्टवेयर उसे खारिज कर देगा और क्रेता-विक्रेता के मोबाइल फोन पर ओटीपी ही नहीं आएगा। इससे रजिस्ट्री ही नहीं हो पाएगी।
बता दें कि रजिस्ट्री विभाग में लगाए गए पुराने साॅफ्टवेयर में इस तरह की जालसाजी को पकड़ने के लिए कोई सिस्टम नहीं था। धंधेबाज जमीनों का कूट रचित खतौनी तैयार करते थे और उसमें असंक्रमणीय को संक्रमणीय दिखा देते थे। ऑनलाइन जांच की व्यवस्था न होने से इसे पकड़ा नहीं जाता था और ऐसी जमीनों की भी रजिस्ट्री हो जाती थी। वरिष्ठ अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव का कहना है कि अब रजिस्ट्री के समय दस्तावेज अपलोड करते समय खतौनी का यूनिक कोड डालना अनिवार्य है।
ऑप्शन पर हां टिक कर कोड को अपलोड करना है। अगर सरकारी जमीन है तो नहीं लिखना होगा। इसके बिना प्रक्रिया आगे ही नहीं बढ़ेगी और आवेदन खारिज हो जाएगा। इस प्रक्रिया में क्रेता और विक्रेता दोनों के ही मोबाइल फोन पर ओटीपी जाएगा। अगर ओटीपी नहीं जाता है तो रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी। विभाग के लोग भी इस नई प्रक्रिया के आने से काफी राहत महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे फर्जीवाड़ा रुकेगा, जमीन की नवईयत भी पता हो जाएगी।