संतकबीरनगर। विद्युत निगमों के निजीकरण के विरोध में शुक्रवार को विद्युत कर्मियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया। इस दौरान विद्युत कर्मियों ने ऊर्जा मंत्री के बयान पर आक्रोश जताया और निजीकरण का फैसला वापस लिए जाने की मांग किया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर बिजली कर्मी काफी दिनों से आंदोलित है। शुक्रवार को विद्युत कर्मियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरन दिया। इस दौरान प्रदेश के ऊर्जा मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि ऊर्जा मंत्री सचमुच भ्रष्टाचार समाप्त करना चाहते हैं तो बिजली के निजीकरण की पूरी तरह भ्रष्टाचार में डूबी हुई प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करें।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी इंजीनियर राजेश कुमार ने कहा कि ऊर्जा मंत्री का यह बयान कि अब एक ट्रांसफार्मर फूंकेगा तो एक अधिकारी भी फूंकेगा, यह निंदनीय है। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश के बिजलीकर्मी मुख्यमंत्री पर पूरा विश्वास रखते हुए उनके कुशल नेतृत्व में लगातार बिजली व्यवस्था के सुधार में लगे हुए हैं, तब ऊर्जा मंत्री द्वारा दिए गए ऐसे भड़काउ बयान से अनावश्यक तौर पर ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण उत्पन्न हो रहा है जो उचित नहीं है।इस दौरान इंजीनियर मुकेश गुप्ता, प्रदुम्म, धीरेंद्र यादव, सुनील प्रजापति, नारायण चंद्र चौरसिया, संजय यादव, आशीष कुमार, दिलीप सिंह, राघवेंद्र, रामअचल यादव, पुष्पेंद्र भारती, भाष्कर पांडेय, दिनेश चन्द्र, विवेक पासवान, मनोज कुमार, विजय कुमार आदि मौजूद रहे।