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अजीजुल हक के फर्जी दस्तावेज के सहारे बने पासपोर्ट प्रकरण की जांच शुरू

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अजीजुल हक के फर्जी दस्तावेज के सहारे बने पासपोर्ट प्रकरण की जांच शुरू
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पासपोर्ट सत्यापन करने वाले जिम्मेदार भी रडार पर
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। फर्जी दस्तावेज के सहारे पासपोर्ट बनवाने वाले रोहिग्यां अजीजुल हक मामले की जांच एसपी ने शुरू करा दी है। मामले की जांच एलआईयू इंसपेक्टर त्रिलोचन त्रिपाठी को मिली है। इसमें पासपोर्ट का सत्यापन करने वाले भी रडार पर आ गए हैं। इधर, एटीएस की ओर से पूछताछ के लिए उठाए गए तकनीकी सहायक अब्दुल मन्नान के परिजन परेशान हैं।
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बृहस्पतिवार की देर शाम एटीएस की टीम ने जिले में कोतवाली और बखिरा क्षेत्र में छापा मारा था। एटीएस टीम ने रोहिग्यां अजीजुल हक की गिरफ्तारी के बाद जांच की गति बढ़ा दी। बखिरा क्षेत्र के नौरो गांव निवासी बदरे आलम के बेटे के साथ कई वर्ष पूर्व अजीजुल हक मुंबई से यहां आया था। अजीजुल हक ने फर्जी दस्तावेज के सहारे पासपोर्ट बनवा लिया था। यह बात सामने आने पर हड़कंप मच गया है। सूत्रों की मानें तो वर्ष 2011 में अजीजुल हक का पासपोर्ट बना है। इसमें किस तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार किया और उसे बनवाने में किसकी-किसकी भूमिका रही है। यह सब जांच के बिंदु हैं। इधर, शहर के मोतीनगर के रहने वाले उठाए गए तकनीकी सहायक अब्दुल मन्नान के परिजन काफी परेशान हैं। परिजन उन्हें निर्दोष बता रहे हैं और जल्द घर वापस आने की उम्मीद जता रहे हैं। इधर, एसपी डॉक्टर कौस्तुभ ने बताया कि फर्जी दस्तावेज के सहारे पासपोर्ट बनाए जाने की जांच शुरू करा दी गई है। जांच में यह देखा जाएगा कि उसका पासपोर्ट आखिर किस वर्ष में बना है। उस दौरान बखिरा थाने पर कौन एसओ रहा और कौन एलआईयू शाखा में प्रभारी रहा। किस साक्ष्य के आधार पर आखिर उसका पासपोर्ट बनाए जाने की संस्तुति की गई। इसमें जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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