संतकबीरनगर। जिले के 45 स्कूलों के 350 शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के जीपीएफ मद के 68 करोड़ रुपये बस्ती के कोषागार में 27 साल से फंसे हुए हैं। बताया जा रहा है कि पैरवी के अभाव में यह रकम बस्ती से अलग होकर नया जिला बनने के बाद ट्रांसफर नहीं हो पाई।
ऐसे में अब मार्च-2025 में सेवानिवृत्त होने जा रहे जिले के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का जीपीएफ का भुगतान नहीं हो पाएगा। डीआईओएस ने बस्ती के डीआईओएस को पत्र भेजकर रकम ट्रांसफर कराने की मांग की है।
वर्ष 1997 में बस्ती का कुछ हिस्सा अलग करके नया जिला संतकबीरनगर बनाया गया। इसमें सिद्धार्थनगर का कुछ क्षेत्र भी शामिल किया गया। इससे पहले माध्यमिक शिक्षकों का वेतन भुगतान, जीपीएफ से संबंधित खाते का संचालन बस्ती और सिद्धार्थनगर से होता था।
जीपीएफ मद के करीब 68 करोड़ रुपये बस्ती डीआईओएस कार्यालय के खाते में डंप पड़े हैं। विभाजन से पूर्व मौजूदा संतकबीरनगर के 34 सहायता प्राप्त और 11 संस्कृत स्कूलों के 350 शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के जीपीएफ की रकम बस्ती में ही जमा होती थी।
विभाजन के बाद जीपीएफ की धनराशि संतकबीरनगर के कोषागार में हस्तांतरित हो जानी थी लेकिन गंभीरता से पैरवी न किए जाने के कारण 27 वर्ष बाद भी रकम ट्रांसफर नहीं हो पाई।
अगर यह रकम नहीं आई तो मार्च-2025 में सेवानिवृत्त होने जा रहे लगभग 20 शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का भुगतान फंस जाएगा। इसको लेकर शिक्षक संघ ने भी नाराजगी जताई है। जिला विद्यालय निरीक्षक ने बस्ती के डीआईओएस को पत्र लिखकर जीपीएफ की रकम ट्रांसफर कराने की सिफारिश की है।