डाॅ तन्वांगी मणि, मनोचिकित्सक, बोर्ड परीक्षा में
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल की मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. तन्वांगी मणि शुक्ला ने बताया कि आजकल छात्रों में बोर्ड परीक्षा का भय केवल अच्छे अंक लाने का नहीं बल्कि असफलता के डर और दूसरों से तुलना के कारण बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश शिक्षा प्रणाली में अंकों को ही बुद्धिमत्ता का पैमाना मान लिया गया है। इससे छात्र घबराहट, नींद न आना और आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हर बच्चे की सीखने की गति अलग होती है। उन्होंने छात्रों को सुझाव दिया कि वे खुद को रोबोट न समझें। पढ़ाई के दौरान हर 45-50 मिनट में 10 मिनट का ब्रेक लेना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि कठिन विषयों की तैयारी के लिए सुबह का समय सबसे उपयुक्त है। रात को पर्याप्त नींद भी जरूरी है। पढ़ाई को लेकर कोई भी तनाव न लें। पढ़ाई के दौरान बीच-बीच में ब्रेक लेना जरूरी होता है। लगातार पढ़ते रहने से तनाव बढ़ता है। ऐसे में सोच समझकर तैयारी करें। जो विषय न समझ आए उसे अपने शिक्षकों से साझा कर लिया करे।
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परीक्षार्थियों को इन बातों का रखना होगा ध्यान
- दिमाग को तरोताजा रखने के लिए सात से आठ घंटे की पर्याप्त नींद जरूरी है।
- एकाग्रता बढ़ाने के लिए अनुलोम-विलोम और ध्यान करें।
- जंक फूड से बचें, ताजे फल और पर्याप्त पानी का सेवन करें।
- एक निश्चित समय सारणी बनाएं और उसका सख्ती से पालन करें।
- तनाव अधिक होने पर माता-पिता या शिक्षकों से समस्या साझा करें।