धनघटा। तहसील क्षेत्र में डीएपी खाद की किल्लत है। इस बीच किसानों से मनमानी दाम वसूला जा रहा है। इससे नाराज किसानों का गुस्सा फूट रहा है। सहकारी समितियों पर किसानों का विरोध प्रदर्शन भी हो रहा है, लेकिन संबंधित अधिकारी खामोश बैठे हैं। क्षेत्र में आलम यह है कि 1350 रुपये में मिलने वाली डीएपी की बोरी का दाम किसानों से 1600 रुपये वसूला जा रहा है। अक्तूबर के आखिरी सप्ताह में धान की कटाई मड़ाई शुरू होने के बाद रबी फसलों की तैयारियां जोर पकड़ने लगी है। रबी के सीजन में बोई जाने वाली तिलहनी, दलहनी व आलू फसलों की बुआई के लिए इस बार किसानों में तेजी देखी जा रही है। किसान इन फसलों की बुआई के लिए डीएपी के लिए इधर-उधर दौड़ भाग कर रहे हैं। हैंसर, लोहरैया, उमरिया बाजार, नाथनगर, काली जगदीशपुर, पौली, मड़पौना, छपरा मगर्वी, डिहवा बाजार, धनघटा आदि समितियों व प्राइवेट दुकानों में डीएपी की किल्लत है।
ऐसे में जहां कहीं डीएपी की आपूर्ति हो रही है वहां किसानों से निर्धारित मूल्य की जगह मनमाने ढंग से अधिक दाम वसूले जा रहे है। हैंसर, नाथनगर व पौली की समितियों पर पहुंचने वाली डीएपी का दाम निर्धारित रेट 1350 से अधिक वसूले जाने से किसान आक्रोशित है। बुधवार को हैंसर ब्लाक क्षेत्र सहकारी समिति औराडाड़ में डीएपी की मनमानी कीमत वसूले जाने को लेकर किसानों ने प्रदर्शन किया था। इस बीच मौके पर चल रहा डीएपी वितरण का कार्य रोक दिया गया। औराडाड़ समिति पर मौजूद किसान भालचंद यादव, निसार अहमद, चंदेश्वर, भोला, विशाल, राजू, प्रभात, अजय, रामदरस, विनय, पप्पू राय दीपक, श्याम सुंदर राजाराम ने मनमानी कीमत वसूले जाने को लेकर कहा कि सुबह से चार घंटे लाइन में लगने के बाद सचिव ने पासबुक जमा कर किसानों से अंगूठा लगवाया, लेकिन जब खाद वितरित करने का समय आया तो सचिव गायब हो गए।
इस संबंध में एसडीएम धनघटा सुनील कुमार ने बताया कि खाद की ओवर रेटिंग की शिकायत नही मिली है। शिकायत मिलने के बाद जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।