संतकबीरनगर। मेंहदावल तहसील क्षेत्र के बौधरा में 19 साल पहले दूसरे गांवों के 33 लोगों को नियम विरुद्ध तरीके से 46 बीघे कृषि भूमि का पट्टा एडीएम न्यायिक कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। इस जमीन को ग्राम समाज के खाते में दर्ज करने का भी आदेश पारित किया है।
एडीएम न्यायिक अनिल मिश्र ने बताया कि मेंहदावल तहसील क्षेत्र के बौधरा, मलाई और चौरईला में वर्ष 1998 में तत्कालीन एसडीएम ने 33 लोगों के नाम 46 बीघे कृषि भूमि का पट्टा किया था। उसी दौरान गलत तरीके से पट्टा आवंटन की शिकायत दर्ज कराई गई। वर्ष 2002 से पट्टा आवंटन निरस्तीकरण का मुकदमा भी शुरू हो गया।
पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों से पता चला कि बौधरा गांव के सिर्फ छह लोगों को पट्टा आवंटित किया गया, जो अपात्र हैं। जबकि धौरापार, अमिलहवा, गगनई राव, बढ़या और मेंहदावल कस्बे के रहने वाले लोगों को भी जमीन का कृषि पट्टा दे दिया गया।
जबकि उसी ग्राम पंचायत के पात्र लोगों को ही पट्टा देने का प्रावधान है। एडीएम न्यायिक ने बताया कि नियम विरुद्ध तरीके से आवंटित पट्टा निरस्त कर दिया गया है। बौधरा के निवासी आवंटी भी अपात्र थे। यह जमीन ग्राम समाज के खाते में दर्ज करने का भी आदेश पारित किया गया है।