संतकबीरनगर। घोड़े, गधे, खच्चर, टट्टू के लिए जानलेवा मानी जाने वाली ग्लैंडर्स फार्सी का संक्रमण संतकबीरनगर में फैलने से प्रशासन सकते में आ गया। पशु पालकों को अलर्ट कर दिया गया है। रोग की पुष्टि होने पर प्रशासनिक देखरेख में घोड़ी को इंजेक्शन देकर मौत की गहरी नींद सुला दिया गया। हाई अलर्ट के बीच प्रतिदिन 20 पशुओं का सेंपल लेकर जांच कराई जाएगी। जबकि घोड़े और इस प्रजाति के अन्य पशुओं पालने वाले लोगों का भी स्वास्थ्य परीक्षण कराए जाने का निर्देश डीएम ने सीएमओ को दिया है।
करीब दस महीने पहले बाराबंकी में एक घोड़ा के ग्लैंडर्स फार्सी की चपेट में आने पर संतकबीरनगर में जून 2017 में घोड़े, गधों के 20 ब्लड सैंपल जांच के लिए हिसार स्थिति राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र भेजे गए थे। 12 जून 2017 को आई जांच रिपोर्ट में पहली दफा बरडांड़ स्थित ईट भट्ठे पर मौजूद दो घोड़ों में इस बीमारी के लक्षण मिले थे। उसके बाद दोनों घोड़ों को दर्द रहित इंजेक्शन देकर मौत की नींद सुला दिया गया था।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी टीपी मिश्र और डिप्टी सीवीओ ओपी मिश्र ने बताया कि 27 जनवरी को बखिरा क्षेत्र में स्थित बबलू सिंह के हटवा स्थित ईट भट्ठे पर काम करने वाला अलीगढ़ जिले के दत्ताचोली बुजुर्ग गांव निवासी मजदूर सुरेश पुत्र कल्लू अपने घोड़े को लेकर पशु चिकित्सालय पर आया था।
प्रथम दृष्ट्या घोड़े में ग्लैंडर्स के लक्षण का शक हुआ। उसके बाद बबलू सिंह के हटवा और घिचुवा स्थित दोनों ईट भट्ठे से दस घोड़े व खच्चर का सैंपल लेकर जांच के लिए राष्टीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार भेजा गया। जांच के बाद हटवा ईट भट्टे के अलीगढ़ के रहने वाले मजदूर सुरेश की एक घोड़ी में ग्लैंडर्स फार्सी की बीमारी के लक्षण की पुष्टि हुई।
घिचुवा ईंट भट्ठे पर अलीगढ़ के मजदूर गोविंद पुत्र दामोदर के खच्चर में पुष्टि तो नहीं हुई लेकिन संदिग्ध रिपोर्ट की वजह से दोबारा सैंपल लिया गया। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की देखरेख में डॉक्टर मोहिंदर प्रसाद, डॉक्टर हरेंद्र प्रकाश चौरसिया और डॉक्टर रामकृष्ण पटेल ने हटवा पहुंचा कर ग्लैंडर्स फार्सी पीड़ित घोड़ी को दर्द रहित इंजेक्शन देकर मौत की नींद सुला दिया।
संक्रमण से बचाव को ध्यान में रखते हुए नमक चूने के मिश्रण के साथ आबादी से दूर घोड़ी को दस फीट से अधिक गहराई में दफन कर दिया गया। पता चला है कि ईट भट्ठों पर घुमंतू शैली में आने वाले श्रमिकों के साथ में ये घोड़े बुलंदशहर और आगरा, अलीगढ़ की तरफ से आए थे। एहतियातन प्रतिदिन घोड़े, गधे, खच्चर के 20 सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाएंगे।
हटवा ईंट भट्ठे पर काम करने वाले मजदूरों की जांच और प्रतिरक्षण के लिए डीएम ने सीएमओ केे मेडिकल टीम सक्रिय करने का निर्देश दिया है। अधिक जानकारी के लिए दिल्ली स्थित नेशनल सेंटर फार कम्युनिकेबल डिसीज से भी संपर्क स्थापित किया जाएगा।
ग्लैंडर्स के लक्षण
शरीर पर फोड़े या गांठ, नाक में छाले,पीला स्राव बहना,सांस में दिक्कत,बुखार,खासने जैसी धसक उठना
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर ओपी मिश्र ने बताया कि जिस घोड़े अथवा खच्चर में ग्लैंडर्स की पुष्टि होने के बाद उसे मौत की नींद सुलाया जाता है। उसके मालिक को शासन की तरफ से 25,000 रुपये की सहायता दी जाती है। हटर्वा इंट भट्ठे के मजदूर सुरेश को भी शासन से 25 हजार रुपये दिलाने के लिए रिपोर्ट भेजी जा रही है।
इंसान में भी हो सकता हैं संक्रमण
संतकबीरनगर। उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर ओपी मिश्र ने बताया कि इस रोग के संक्रमण वाले घोड़े, गधे, खच्चर के करीब रहने वाले अथवा अश्वशाला में काम करने वाले लोगों में भी ग्लैैैंडर्स फार्सी का संक्रमण हो सकता है। संक्रमित इंसानों में संक्रमित पशु के जैसे लक्षण उभरते हैं। इसी नजरिए से सीएमओ के जरिए मेडिकल टीम सक्रिय की जा रही है।