---अमर उजाला इम्पैक्ट--
सीडब्ल्यूसी तक पहुंची मासूमों की पीड़ा, रिपोर्ट तलब
- बाल कल्याण समिति (न्यायालय) की पूर्ण पीठ ने किया मामले पर विचार
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। मां की मौत के बाद अनाथ हुए नौ साल के संदीप और उसके दो छोटे भाइयों मंदीप व मनीष की पीड़ा मंगलवार को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) तक पहुंच गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए समिति (न्यायालय) की पूर्ण पीठ ने मामले पर विचार किया। उसने बाल कल्याण अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता से बच्चों की पूरी रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट के आधार पर मासूमों को किसी संस्था के संरक्षण में देने का फैसला होगा।
पिछले बृहस्पतिवार को संदीप और उसके दो छोटे भाइयों के सिर से मां का साया उठ गया था। पिता की पहले ही सड़क हादसे में मौत हो गई थी। मामले की जानकारी मिली तो शुक्रवार को एसडीएम दुघरा कला गांव पहुंचे और बच्चों को मदद दिलाने का आश्वासन दिया। शनिवार को क्षेत्र के विधायक बच्चों से मिले। सोमवार को जिला प्रोवेशन अधिकारी राकेश कुमार व संतकबीरनगर बाल आश्रम के अधीक्षक डॉ. अजय पांडेय में गांव पहुंचकर बच्चों के बारे में जानकारी हासिल की थी। इसके बाद जिला प्रोवेशन अधिकारी ने सीडब्ल्यूसी को अपनी रिपोर्ट भेजी। समिति की पूर्ण पीठ ने मसले पर विचार के बाद बाल कल्याण अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता से मौके पर जाकर बच्चों की दशा, उनकी सामाजिक व आर्थिक स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है।
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बाल कल्याण अधिकारी की आलोचना, नोटिस भेजने का निर्देश
- सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष अमित कुमार उपाध्याय ने मासूम बच्चों के मामले में बाल कल्याण अधिकारी धनघटा (थाने के नामित सब इंस्पेक्टर) के रवैये की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अफसर को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है। समिति के सदस्यों सत्यप्रकाश टीटू, विद्यानंद, हनुमान प्रसाद गुप्ता और नुजहत नसीम खान ने अमर उजाला की सराहना की। कहा कि जो कर्तव्य बाल कल्याण अधिकारी को निभाना चाहिए था, उसे अमर उजाला ने निभाया। उन्होंने बताया कि बाल कल्याण अधिकारी ने इस मामले में अब तक रिपोर्ट नहीं दी है।
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समिति तय करेगी बच्चों का भविष्य
- जिला स्तरीय बाल कल्याण समिति इस तरह के मामलों में न्यायालय का कार्य करती है। समिति ऐसे मामलों पर विस्तृत रिपोर्ट तलब कर उसका गहन अध्ययन करती है। सामाजिक व आर्थिक पहलुओं के अध्ययन के बाद समिति तय करती है कि बच्चों के पालन-पोषण और पढ़ाई की जिम्मेदारी किसे दी जाए। समिति ने दुघरा कला गांव के अनाथ हुए तीनों बच्चों के बारे में रिपोर्ट तलब कर ली है। गौरतलब है कि संतकबीर बाल आश्रम, खलीलाबाद और दिल्ली की संस्था अटल बिहारी सेवा संस्थान समेत कई सामाजिक संगठनों ने बच्चों की जिम्मेदारी उठाने की इच्छा जताई है।