मेंहदावल। कथावाचक आचार्य धनन्जय महाराज ने कहा कि मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं। लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है। इसलिए गलतियों का प्रायश्चित आवश्यक है।
यह बातें उन्होंने मेंहदावल तहसील क्षेत्र में राप्ती के तट पर स्थित जोरवा गांव में कथा के यजमान वीरेन्द्र पांडेय, केवला देवी, व आरती पांडेय को श्रीमद्भागवत के कथा रस का अमृतपान कराते हुए कथा के दूसरे दिन कही। कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि परीक्षित कलियुग के प्रभाव के कारण ऋषि से श्रापित हो जाते हैं। उसी के पश्चाताप में वह शुकदेव जी के पास जाते हैं।
वह उन्हें बताते हैं कि भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है, जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है। कथा व्यास ने आगे कहा कि द्वापर युग में धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्यदेव की उपासना कर अक्षयपात्र की प्राप्ति किया।
इस दौरान जितेन्द्र नाथ पांडेय, सत्येन्द्र नाथ पांडेय, शिवांगी , अमन, ग्राम प्रधान रतन, हरिशंकर, पप्पू पांडेय आदि लोग मौजूद रहे।