धनघटा। जिले में डीएपी पर्याप्त मात्रा में होने का दावा कृषि विभाग के अधिकारी कर रहे हैं, लेकिन साधन सहकारी समितियों और खाद के फुटकर विक्रेताओं के गोदाम खाली पड़े हैं। डीएपी के लिए किसान परेशान हैं।
धान की कटाई के बाद किसान अब रबी की बुआई में जुट गए हैं। जिन किसानों के खेत में नमी है, उन लोगों ने नमी समाप्त होने के भय से रबी की बुआई शुरू कर दी है। जिनके खेतों में नमी नहीं है, वे खेत का पलेवा कर रहे हैं। इस बीच डीएपी न मिलने से किसान परेशान हैं। किसान राम उग्रह, रमेश चंद्र, राममिलन, सुखदेव, बाबूराम, परशुराम चौधरी आदि का कहना है कि साधन सहकारी समितियों पर एक सप्ताह में एक ट्रक खाद आती है, तो किसानों की इतनी भीड़ हो जाती है कि सभी किसान खाद नहीं पाते हैं। फुटकर खाद विक्रेता डीएपी देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि सरकारी दावा हकीकत से उलट है। अगर पर्याप्त मात्रा में सभी साधन सहकारी समितियों और फुटकर खाद विक्रेताओं के गोदाम में डीएपी खाद पहुंच जाए तो समस्त किसानों की समस्या का समाधान हो जाएगा। कुछ किसान पहले ही खाद खरीद कर रख ली है, लेकिन अधिकतर किसान अब भी खाद के लिए भटक रहे हैं। यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में डीएपी के लिए और परेशानी झेलनी पड़ेगी।
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नकली खाद बेचने पर सचिव पर दर्ज हुआ है केस
छह नवंबर को साधन सहकारी समिति लिमिटेड जामडीह बघौली से किसानों को नकली खाद बेचने मामला जांच में सही मिला था। जिला कृषि अधिकारी पीसी विश्वकर्मा ने समिति के सचिव घनश्याम श्रीवास्तव के खिलाफ कोतवाली पुलिस को तहरीर दी। पुलिस ने सचिव पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया है।
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रबी अभियान में 29 अक्तूबर 2022 तक 1621 मीट्रिक टन डीएपी की खपत हुई थी। जबकि वर्तमान रबी में 29 अक्तूबर 2023 तक 2821 मीट्रिक टन डीएपी की बिक्री हो चुकी है। जो पिछले वर्ष से 12 सौ मीट्रिक टन अधिक है। यह प्रदर्शित करता है कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष डीएपी की उपलब्धता अधिक है। अभी गोदाम में 2400 मीट्रिक टन डीएपी का भंडार है। जिसका आवंटन साधन सहकारी समितियों को किया जा रहा है। इसके साथ ही फुटकर खाद विक्रेताओं को भी डीएपी उपलब्ध कराई जा रही है। डीएपी की कोई कमी हीं है। -पीसी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी