रोसयाबाजार। परिषदीय स्कूलों में नौनिहालों को जर्जर भवन और जलभराव के बीच पढ़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। बारिश के समय छत से पानी भी टपकता है। जिसकी वजह से बच्चों को परेशानी उठानी पड़ती है। इसके साथ ही विद्यालयों के परिसर में झाड़-झंखाड़ भी हैं, इससे बच्चों को हर समय खतरा बना रहता है। वहीं हालत यह है कि बच्चों की संख्या बढ़ने के बजाय घटती ही जा रही है।
जिले में 1247 परिषदीय विद्यालय हैं। इसमें से 805 प्राथमिक विद्यालय, 250 कंपोजिट विद्यालय व 192 उच्च प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। इनमें एक लाख तीन हजार बच्चों का नामांकन का दावा विभाग करता है, लेकिन कहीं भी बच्चों की उपस्थिति शत प्रतिशत नहीं मिली। जबकि बच्चों को सरकार की तरफ से स्कूल ड्रेस, बैग, जूता मोजा आदि का डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के खाते में 12 सौ रुपये भी भेजा जात है।
वहीं एमडीएम के तहत भोजन और काॅपी किताब भी निशुल्क दिया जाता है, लेकिन भवन से लगाय अन्य व्यवस्था लड़खड़ा गई है। जहां जर्जर भवनों में बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं वहीं परिसर में जलभराव के चलते परेशानियों का सामना करना पड़ता है लेकिन व्यवस्था सुधरने बजाए बिगड़ती ही जा रही है और अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने जब पड़ताल की तो हकीकत सामने आई। शिवबखरी में विद्यालय परिसर में उगे झाड़-झंखाड़ : प्राथमिक विद्यालय शिवबखरी में 72 बच्चों का नामांकन है, जबकि 68 बच्चे मौके पर मिले। यहां पर शौचालय बदहाल है और परिसर में झाड़-झंखाड उग गया है। अतिरिक्त कक्ष जर्जर हालात में हैं, इससे हमेशा डर बना रहता है। प्रधानाध्यापक रमेश ने बताया कि दो शिक्षा मित्र तैनात हैं। परिसर में आंगनबाड़ी के बच्चे भी हैं। शौचालय भी बदहाल है। इसके लिए ग्राम पंचायत के साथ ही बीआरसी को भी लिखा गया लेकिन अभी तक परिसर से झाड-झंखाड़ को साफ नहीं कराया गया। जिससे हमेशा कीड़े-मकोड़े का डर बना रहता है।
धौरहरा में बारिश में टपकता है विद्यालय का छत : प्राथमिक विद्यालय धौरहरा में 42 बच्चे पंजीकृत है। जिसमे से मौके पर 10 ही बच्चे उपस्थित रहे। जिस कमरे में बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे थे वहां पर कमरे का छत बारिश के समय टपकता है। जिससे बच्चों की शिक्षा में परेशानी होती है। यहां पर बच्चों के लिए बना शौचालय बदहाल हो गया है। प्रधानाध्यापक राणा प्रताप यादव ने बताया कि बारिश के समय दिक्कत होती है।
छत टपकता है। जिससे बच्चों को पढ़ाने में समस्या आती है। भवन की मरम्मत जरूरी है इसके लिए विभाग को कई बार पत्र भेजा गया लेकिन अभी तक इसके लिए कोई पहल नहीं हुई।
चहारदीवारी न होने से परेशानी : प्राथमिक विद्यालय चंदौली माफी में पंजीकृत बच्चे 50 के सापेक्ष 48 बच्चे उपस्थित रहे। हेडमास्टर राजेश कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि यहां पर जर्जर भवन का ध्वस्तीकरण करा दिया गया। चहारदीवारी नहीं है, जिससे हमेशा डर बना रहता है कि कही कोई जानवर परिसर में न आ जाए। आए दिन अराजक तत्व आते रहते हैं। यहां पर बच्चों के प्रार्थना के लिए जगह नहीं है। इसकी वजह से कमरे में प्रार्थना करानी पड़ती है। कम्पोजिट विद्यालय तिलकुपुर में कुल पंजीकृत बच्चों की संख्या 187 है। जिसके लिए सात शिक्षक तैनात हैं। मौके पर 136 बच्चे मिले। इंचार्ज उर्मिला देवी छुट्टी पर थी और अध्यापक समय से मौजूद रहे। विद्यालय केपरिसर में जलभराव था। जिससे बच्चों को आने जाने में समस्या उठानी पड़ रही थी। भवन भी जर्जर है और बारिश के समय पानी टपकता है। बच्चों के लिए हमेशा भय बना रहता है कि कही कोई घटना न हो जाए। शिक्षक बच्चों की निगरानी में रहते है। प्रधानाध्यापिका ने कई बार जर्जर भवन के बारे में विभाग को पत्र भेजा लेकिन अभी तक इसकी कोई सुनवाई नहीं हो पाई।