धनघटा। कार्तिक मास की पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है। आध्यात्मिक और शारीरिक ऊर्जा संचय के लिए कार्तिक मास सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस दिन स्नान व दीपदान करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
ये बातें वाचस्पति मिश्र ने कहीं। उन्होंने कहा कि कार्तिक माह आध्यात्मिक दृष्टि कोण से बडा महत्वपूर्ण है। स्वयं नारायण ने भी कहा है कि माहों में, मैं कार्तिक माह हूँ। इस माह की त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा को शास्त्रों ने अति पुष्करिणी कहा है। स्कंद पुराण के अनुसार जो प्राणी कार्तिक मास में प्रतिदिन स्नान करता है, वह यदि केवल इन तीन तिथियों में सूर्योदय से पूर्व स्नान करें तो भी पूर्ण फल का भागी हो जाता है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने का बहुत महत्त्व बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से पूरे वर्ष गंगा स्नान करने का फल मिलता है। इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों एवं तीर्थों में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। पूर्णिमा को स्नान, अर्घ्य, तर्पण, जप-तप, पूजन, कीर्तन एवं दान-पुण्य करने से स्वयं भगवान विष्णु प्राणियों को ब्रह्मघात और अन्य पापों से मुक्त करके जीव को शुद्ध कर देते हैं। पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद श्री सत्यनारायण कथा का श्रवण, गीता पाठ, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ व ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जप करने से प्राणी पापमुक्त व कर्जमुक्त होकर विष्णु की कृपा पाता है।