बस्ती। स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्सिंग कर्मियों की संख्या और उनके मानदेय को लेकर विसंगतियां सामने आने के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने बस्ती मंडल के तीनों जिलों से अभिलेख तलब किए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बस्ती, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर से गूगल शीट पर भेजे गए आंकड़ों और वास्तविक स्वीकृतियों में अंतर मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
महानिदेशालय ने बस्ती मंडल के अपर निदेशक को पत्र भेजकर संबंधित आहरण-वितरण अधिकारियों को जरूरी अभिलेखों के साथ मुख्यालय बुलाया था। 16 सितंबर को तीनों जिलों के लेखाकार, लेखा लिपिक और पटल सहायक लखनऊ स्थित महानिदेशालय के बजट अनुभाग में मूल अभिलेखों के साथ उपस्थित हुए। विभाग अब पूर्व में भेजी गई सूचनाओं का मिलान संबंधित पत्रावलियों से कर रहा है।
महानिदेशालय ने संबंधित अधिकारियों से आउटसोर्सिंग कर्मियों के संबंध में तीन बिंदुओं पर साक्ष्य सहित जानकारी मांगी है। इनमें कर्मियों को रखने के आदेश और स्वीकृति किस स्तर से दी गई, वर्तमान में तैनात कर्मियों की वास्तविक संख्या और उन्हें दिए जा रहे मासिक मानदेय का विवरण शामिल है। इसके अलावा सेवा प्रदाता कंपनियों से संबंधित निविदा और अनुबंध की छायाप्रति भी मांगी गई है।
जांच का उद्देश्य स्वीकृत पदों और वास्तविक तैनाती के बीच अंतर की स्थिति स्पष्ट करना है। विभागीय स्तर पर यह भी देखा जा रहा है कि कहीं निर्धारित संख्या से अधिक कर्मियों को दिखाकर बजट आहरित तो नहीं किया गया।
बिना अनुमति बढ़ी संख्या तो नहीं मिलेगा बजट ः महानिदेशालय ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में आउटसोर्सिंग कर्मियों की संख्या में बिना पूर्व अनुमति बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। बिना महानिदेशालय की स्वीकृति के नए कर्मियों की तैनाती होने पर उनके मानदेय के भुगतान के लिए बजट आवंटित नहीं किया जाएगा। ऐसी स्थिति में होने वाली वित्तीय क्षति या विवाद के लिए संबंधित आहरण-वितरण अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा। मामले की जांच में सहयोग के लिए मुख्य संपरीक्षा अधिकारी की ओर से दो ऑडिटर्स को भी लगाया गया है। संवाद