डीएओ ने उर्वरक बिक्री केंद्र पर छापा मारा, डुप्लीकेट डीएपी बरामद
केंद्र को सील करते हुए उर्वरक की बिक्री पर लगाया रोक
बिक्री केंद्र के प्रोपराइटर पर दुधारा थाने में दर्ज कराया ईसी एक्ट का केस
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। जिले में उत्पन्न हुई डीएपी की किल्लत की वजह से डुप्लीकेट डीएपी की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। जिला कृषि अधिकारी ने सूचना पर
बुधवार को जैविक कृषि केंद्र परसा कला में छापा मारकर पकड़ा। इस केंद्र को सील करते हुए उर्वरक की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके साथ ही प्रोपराइटर पर दुधारा थाने में ईसी एक्ट के तहत केस दर्ज कराया।
जिला कृषि अधिकारी पीसी विश्वकर्मा ने बताया कि सूचना के आधार पर उक्त केंद्र पर छापा मारा। मौके से बायोविंग्स आर्गेनिक कंपनी बरेली की पहलवान 100 प्रतिशत आर्गेनिक डीएपी की 10 किलो ग्राम का 66 पैकेट मिला। जानकारी करने पर विक्रेता के जरिए बताया गया कि बायोविंग्स एवं बायोवेल नामक कंपनी के आर्गेनिक उत्पादों की बिक्री की जाती है। जांच में पाया गया कि उर्वरक विक्रेता के पास उर्वरक बिक्री प्राधिकार पत्र नहीं है। साथ ही जिस उत्पाद कि वह बिक्री कर रहे हैं, वह डीएपी न होकर भ्रामक नाम से डीएपी बताकर बिक्री की जा रही है। भ्रामक नामों से किसी भी उर्वरक की बिक्री किया जाना उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के प्रावधानों के अनुसार अवैध है। प्रोपराइटर अजाज अहमद जैविक कृषि केंद्र परसा कला के खिलाफ थाना दुधारा में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया गया। डीएम दिव्या मित्तल की ओर से समस्त उर्वरक विक्रेताओं को सचेत किया गया कि नियमानुसार ही उर्वरक की बिक्री करें। भ्रामक नामों से अथवा बिना उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र के अथवा अधिक मूल्य पर उर्वरक बिक्री करने पर, किसानों को उनके उर्वरक खरीद की रसीद नहीं दिए जाने पर संबंधित उर्वरक बिक्री केंद्र के मालिक के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। समस्त उर्वरक विक्रेता किसानों को उनकी भूमि की जोत एवं बोई गई फसल के अनुपात में संतुलित ढंग से उर्वरक की बिक्री निर्धारित मूल्य ही पीओएस मशीन से करें। इसके साथ ही उर्वरक खरीद की रसीद भी किसानों को दें।