संतकबीरनगर। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या एक रमेश दुबे की कोर्ट ने हत्या का प्रयास करने के आरोपी तिलकधारी को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिए। महुली थाने में मामला वर्ष 2011 में दर्ज हुआ था।
थाना महुली पुलिस को वादी रामभरत ने जुबानी सूचना दी कि तिलकधारी व दो अन्य मनबढ़ किस्म के हैं। चुनावी रंजिश को लेकर बंदूक लाठी डंडा से पीटे हैं और जान से मारने की धमकी दी। बड़ा भाई बचाने आया तो उसे भी मारा पीटा। भाई को भी काफी चोटें आई हैं।
चिकित्सकों ने गोरखपुर मेडिकल काॅलेज रेफर कर दिया गया। सूचना के आधार पर एनसीआर दर्ज हुआ। विवेचक ने इंजरी रिपोर्ट के आधार पर हत्या के प्रयास व अन्य धाराओं में आरोपी तिलकधारी के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या एक रमेश दुबे की कोर्ट में दौरान विचारण अभियोजन पक्ष ने दो गवाहों को परीक्षित कराया। बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी दिव्यांग व्यक्ति है बिना सहारे के चलने फिरने में असमर्थ है, उसने कोई अपराध नहीं किया है। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या एक रमेश दुबे की कोर्ट में गवाहों के पक्षद्रोही होने तथा मामले के तथ्य एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए साक्ष्य एवं पक्षों की बहस को सुनने के उपरांत थाना महुली अंतर्गत ग्राम घोरहट के आरोपी तिलकधारी पुत्र रघुवीर को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए 13 साल बाद दोषमुक्त कर दिया।
साथ ही कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि वादी मुकदमा राम भारत ने अपने तहरीर सूचना के विरुद्ध कोर्ट में बयान देने तथा स्वयं स्वीकार करने कि उसने गलत मुकदमा दर्ज कराया था। राम भारत के विरुद्ध प्रकीर्ण वाद दर्ज कर उसे विचारण के लिए तलब किए जाने का आदेश दिया है।ू