मगहर। संतकबीर सहकारी सूती कताई मिल की जमीन पर टेक्सटाइल पार्क बनाने के लिए सर्वे किया गया। इससे अब यहां टेक्सटाइल पार्क बनने की संभावना तेज हो गई है। मिल के बंद हो जाने से करीब 12 सौ मजदूर व उनके परिवार बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं, वहीं मगहर में भी आर्थिक असर पड़ा है, क्योंकि वेतन का बड़ा हिस्सा कस्बे के बाजारों, किरायेदारी में खर्च होता था। सूती कताई मिल बंद हुए लगभग 29 वर्ष बीत चुके हैं। 38 एकड़ में फैली बंद पड़ी सूती मिल को औद्योगिक क्षेत्र घोषित किया है और सर्वे के बाद एक बार फिर लोगों को उम्मीदें जग गई हैं। हतकरघा विभाग के कर्मियों ने दिन पूर्व मिल परिसर में सर्वे किया।
बता दें कि 7 जनवरी 1977 को सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल में संतकबीर सहकारी सूती कताई मिल की स्थापना की गई थी। इस मिल में 1978 से सूती धागे का उत्पादन शुरू हुआ और कम ही दिनों में बाजार में अपनी मजबूत पकड़ मजबूत कर ली थी। बुनकर बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण बुनकरों को सुलभता से सूत मिल जाया करता था। मिल चालू होने से क्षेत्र के अलावा कस्बे के लोगों के हुनरमंद हाथों को काम मिला। मिल मजदूर संगठन के अस्तित्व में आ जाने से वर्ष 1981 में मिल प्रबंधन व मजदूर संगठन के बीच गोलीकांड हो जाने के कारण लगभग मिल 28 दिन तक बंद हो गई थी। इसके बाद आपसी सहमति के बाद पुनः मिल चालू हुई और उत्पादन सुचारू रूप से चलता रहा, लेकिन वर्ष 1989 में सूती मिल में आग लगने के कारण काफी नुकसान हो जाने से यह मिल लगभग दो वर्ष तक बंद पड़ी रही। वर्ष 1992 में पुनः सूती मिल चालू हुई, लेकिन मुनाफे की जगह घाटे के कारण लगातार नहीं चल सकी। वर्ष 1997 में मिल पूरी तरह से बंद हो गई। इसके बाद फेडरेशन ने कर्मचारियों को वीआरएस देने की घोषणा कर दी और तत्कालीन एमडी एसडी खन्ना के कार्यकाल में मिल कर्मचारियों को वीआरएस का भुगतान कर दिया गया। मिल पर बकाया अधिक होने के कारण मुंबई हाई कोर्ट के निर्देश पर मिल में ताला लग गया था। अब इसे इंडस्ट्रियल हब के रूप में विकसित करने की पहल होने से नगर सहित क्षेत्र के लोगों में आशा की किरण जगी और उम्मीद जताई कि अब रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। कर्मचारी फूलमन यादव ने बताया कि हथकरघा उद्योग विभाग के राकेश पांडेय ने सूती मिल परिसर में टेक्सटाइल पार्क के लिए सर्वे किया गया। उन्होंने बताया कि इसमें तमाम छोटी छोटी टेक्सटाइल इकाई स्थापित होंगी। लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके लिए मिल का सर्वे कर रिपोर्ट को दिल्ली भेजा जा रहा है।