सिद्धार्थनगर। गर्मी चढ़ते ही सिद्धार्थनगर के बाजार तरबूज-खरबूज से भर गए हैं। खुदरा कीमत 30-32 रुपये प्रति किलो के आसपास है, लेकिन बाजार की असली तस्वीर सिर्फ सस्ती राहत तक सीमित नहीं है। इस समय पूरा कारोबार बाहरी सप्लाई पर टिकी है जबकि स्थानीय खेतों की फसल अभी पूरी तरह तैयार नहीं हो पाई है।
जिले के नौगढ़, शोहरतगढ़, इटवा और बढ़नी बाजारों में इन दिनों तरबूज और खरबूज की भरमार है। हर दिन ट्रकों से फल मंडियों में उतर रहे हैं और ठेलों से लेकर दुकानों तक हर जगह इनकी बिक्री हो रही है। व्यापारी शिव नंदन श्रीवास्तव के मुताबिक, इस समय ज्यादातर माल आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र से आ रहा है। लंबी दूरी तय कर आने के बावजूद सप्लाई अच्छी होने से कीमत 30-32 रुपये किलो के बीच बनी हुई है।
हालांकि, दूरी का असर क्वालिटी पर साफ दिख रहा है। कई बार फल देखने में अच्छे होते हैं, लेकिन अंदर से फीके या कम मीठे निकलते हैं। व्यापारी मिथिलेश ने बताया, माल बाहर से आता है, रास्ते में गर्मी और हैंडलिंग से असर पड़ता है। ग्राहक मीठा चाहता है, लेकिन हर बार वैसा नहीं मिल पाता। उधर, स्थानीय किसानों की फसल अभी पूरी तरह बाजार में नहीं आई है। जो थोड़ी-बहुत आवक हो रही है, वह भी कई जगह कच्ची निकल रही है। एक किसान के मुताबिक, मौसम के कारण फसल देर से तैयार हुई है। जल्दबाजी में तोड़ने से मिठास नहीं आ रही। इससे स्थानीय माल पर भी ग्राहकों का भरोसा पूरी तरह नहीं बन पा रहा है।
क्वालिटी के साथ-साथ स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट भी बड़ी चुनौती है। तरबूज-खरबूज जल्दी खराब होने वाले फल हैं, ऐसे में लंबी दूरी से आने पर नुकसान बढ़ जाता है। कई बार दबाव या गर्मी के कारण फल फट जाते हैं या अंदर से खराब हो जाते हैं, जिससे व्यापारियों को घाटा उठाना पड़ता है।
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खरीदारों के लिए सुझाव (फायदे-नुकसान)
फायदे:
- शरीर को ठंडक और पानी की पूर्ति
- सस्ते और आसानी से उपलब्ध
- पाचन और त्वचा के लिए लाभकारी
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नुकसान/सावधानी:
- कटे हुए फल से संक्रमण का खतरा
- ज्यादा ठंडा या बासी फल पेट खराब कर सकता है
- केमिकल से पके फल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं
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कैसे पहचानें अच्छा फल
- तरबूज: पीला धब्बा और भारी आवाज
- खरबूज: हल्की खुशबू और नरम छिलका
- तरबूज पर पीला धब्बा (ग्राउंड स्पॉट) हो तो पका माना जाता है
- थपथपाने पर भारी और खोखली आवाज आए
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