बाघनगर (संतकबीरनगर)। सेमरियावां ब्लॉक मुख्यालय स्थित अलहिदायह पब्लिक स्कूल में अदबी सफर के तत्वावधान में मौलाना निसार नदवी की सरपरस्ती में गुरुवार की रात मुशायरे का आयोजन किया गया। देर रात तक शायरों ने कलाम पेश कर खूब वाहवाही बटोरी। श्रोताओं ने मुशायरे का खूब आनंद लिया।
मुशायरे की शुरूआत शायर सलमान कबीर नगरी ने हमद पढ़ कर की। उसके बाद परवेज जिल्ले इलाही ने नात पेश किया। मुशायरे में वसीम खान वसीम के शेर.. जो बांटता था शहर में खैरात कल तलक, वह आज कल है खुद ही परेशान क्या करे, को लोगों ने खूब पसंद किया। डॉ बेचैन बस्तवी के शेर -जिस से दिलो दिमाग को मिलती थी रोशनी, वह बात बुजुर्गों की पुरानी चली गई.. को खूब सराहा गया। हलीम मेंहदालवी ने गरीबी की हालत पर तंज किया उनके शेर मुफलिसी ऐसी शै है मियां - अच्छे अच्छे भी रूठ जाते है लोगों को खूब पसंद आया। अतहर फैजी के शेर लाता है ऐसा वक़्त मुकद्दर कभी कभी , भटका है जंगलो में सिकंदर कभी कभी पढ़कर वाहवाही लूटी। घायल बस्तवी ने जुल्फों को अगर उसने बिखेरा नहीं होता ,सूरज के इलाके में अंधेरा नहीं होता, खूब वाहवाही लूटी। आजिज बस्तवी ने हम सब हैं आदमी मगर इंसान बहुत कम, इंसानियत की रखते हैं पहचान बहुत कम पढ़े कर मानवता को समझाया। इस दौरान मुशायरे की अध्यक्षता कर रहे वसीम खान वसीम ने कहा कि अदबी सफर के द्वारा किए जा रहे अदबी साहित्य को काफी सराहा जा रहा है। कहा कि अदबी मुशायरे से समाज में व्याप्त कुरीतिया, महंगी शादी, शादी में बारात लाने और ले जाने और दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए प्रेरणा मिलती है। मुशायरे में शायर पवन सबा, महमूद खान, मजहर खलीलाबादी, आदि शायरों ने कलाम पेश किया। इस दौरान डॉ नायाब पटना, खैरूलबशर, इरशाद खान, अरमान, रिजवान मुनीर, अबूजर चौधरी, शैदा बस्तवी, रिजवान खान, जईम अहमद आदि मौजूद रहे।