मजार व समाधि स्थल की चहारदीवारी का हो रहा था प्लास्टर कार्य।
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मगहर। संत कबीर की निर्वाण स्थली के सुंदरीकरण कार्य के दौरान मजार और समाधि स्थल की चहारदीवारी के प्लास्टर के कार्य को पुरातत्व विभाग ने रोक दिया है। यूपीपीसीएल संस्था की ओर से कराए जा रहे इस कार्य को पुरातत्व विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लेने के चलते रोका है।
सद्गुरु कबीर की निर्माण स्थली कबीर चौरा परिसर का पर्यटन की दृष्टि से सुंदरीकरण एवं विकास कार्य हो रहा है। पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार ने भारी भरकम धन भी अवमुक्त कर दिया है। कबीर चौरा परिसर के विकास और सुंदरीकरण का कार्य कंपनी कराया जा रहा है।
प्रधानमंत्री के जून महीने में हुए कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के अपर मुख्य सचिव पर्यटन अवनीश अवस्थी की मौजूदगी में कबीर समाधि और मजार की दीवारों को सुरक्षित करने के लिए निर्देश दिया गया था। इसके लिए एक करोड़ बीस लाख रुपये भी अवमुक्त हुए थे।
यूपीपीसीएल कार्यदायी संस्था है। कहा जा रहा है कि इस कार्य के लिए पहले पुरातत्व विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना जरूरी था, लेकिन बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र के ही कार्यदायी संस्था ने प्लास्टर शुरू करा दिया। इसकी जानकारी होने पर पुरातत्व विभाग ने कार्य को रोक दिया।
इस संबंध में पुरातत्व विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी नरसिंह त्यागी ने बताया कि कार्यदाई संस्था को मजार व समाधि स्थल की दीवारों के संरक्षण का कार्य कराना था लेकिन संस्था सुंदरीकरण का कार्य कर रही है। इस कार्य के लिए जरूरी अनापत्ति प्रमाण पत्र भी नहीं लिया गया था, जिसके चलते कार्य रोक दिया गया है।
यहां 19 प्रोजेक्ट पर कार्य कर रही है संस्था
मगहर के कबीर निर्वाण स्थली पर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए लगभग 25 करोड़ रुपये के सुंदरीकरण कार्य के लिए बजट मिला था। इसमें से 19 प्रोजेक्ट पर पीसीएल कंपनी की तरफ से कार्य कराया जा रहा है। इसके अलावा कबीर अकादमी के लिए 24 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। इसका शिलान्यास 28 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।