36 गांवों के पानी की होगी जांच
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संतकबीरनगर। औद्योगिक कचरा युक्त पानी व शहर के सीवरेज के पानी से सिर्फ आमी नदी का पानी ही प्रदूषित नहीं हुआ है, बल्कि अगल-बगल के गांवों का भूगर्भ जल भी दूषित हो चुका है। इंडिया मार्का हैंडपंप भी दूषित पानी उगल रहे हैं। लोगों की इस पीड़ा को आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष ने एनजीटी की हाईपॉवर कमेटी तक पहुंचाया है। इस पर कमेटी के चेयरमैन ने जिला प्रशासन से 36 गांवों के पानी के नमूनों की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
सिद्घार्थनगर जिले के सिकहरा ताल से निकलकर गोरखपुर जिले में जाकर राप्ती नदी में मिलने वाली आमी नदी की कुल लंबाई 136 किलोमीटर है। इसमें से 70 किलोमीटर हिस्सा संतकबीरनगर जिले में पड़ता है। रुधौली चीनी मिल के अलावा खलीलाबाद के कई उद्योगों का रसायन युक्त पानी आमी नदी में गिरता है। मगहर नगर पंचायत के नाले का पानी भी कबीरचौरा के पास नदी में गिराया जाता है। कई वर्षों से नदी की सफाई व प्रदूषित पानी को इसमें गिरने से रोकने के लिए आंदोलन चल रहा है। इस बीच नदी के किनारे बसे गांवों का भूगर्भ जल भी प्रदूषित हो चुका है। आमी नदी के किनारे बसे मोहिउद्दीनपुर, इस्लाम नगर, रसूलाबाद, घनश्यामपुर, धौरहरा आदि गांवों में हैंडपंप का पानी भी प्रदूषित निकल रहा है। लोग अधिकारियों से इसकी कई बार शिकायत कर चुके हैं। मंगलवार को आमी नदी के प्रदूषण की जांच करने आई एनजीटी की हाईपॉवर कमेटी के सामने यह मामला उठा था। आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने गोरखपुर व संतकबीरनगर जिले के 50 से अधिक गांवों की सूची एनजीटी की हाईपॉवर कमेटी को सौंपकर पानी के नमूनों की जांच की मांग की है। उधर, जल निगम के अधिशासी अभियंता वीपी सिंह का कहना है कि बैठक में आमी नदी के किनारे बसे 36 गांवों के भूगर्भ जल के प्रदूषित होने के मामले पर चर्चा की गई थी।