- सरयू का जलस्तर हुआ स्थिर, रहने और खाने की समस्या बरकरार, दूषित जल पीने को मजबूर हैं बाढ़ पीड़ित
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। सरयू खतरे के निशान से पांच सेमी नीचे पहुंच गई है। जलस्तर तो घट रहा है लेकिन अब परेशानियों की बाढ़ आ गई है। पीड़ितों के समक्ष खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है। वहीं जल जनित बीमारियों के फैलने की आशंका से लोग परेशान हैं। इसके अलावा पशुओं के चारे का संकट भी खड़ा हो गया है। बुधवार को नदी का जलस्तर 79.450 मीटर से घटकर खतरे के निशान 79.400 मीटर पर स्थिर है।
इस वर्ष के बढ़ोतरी के सारे रिकॉर्ड को पार करके सरयू जब खतरे के निशान से ऊपर पहुंची तो एमबीडी बांध और नदी के मध्य बसे 34 गांवों पर बाढ़ का संकट मंडराने लगा। अगापुर गुलरिहा, नारायणपुर, कुर्मियान टोला, खालेपुरवा, ढोलबजा, गुनवतिया, पटौवा, भौवापार समेत 16 गांव में बाढ़ का पानी घुस गया। 32 किलोमीटर की लंबाई में चारों तरफ पानी ही पानी दिखने लगा। धान की फसलें जलमग्न हो गईं। जिन गांवों में बाढ़ का पानी घुसा उन गांव के लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो गया।
ध्वस्त हैंडपंप से निकल रहा दूषित पानी पीने की मजबूरी
बाढ़ पीड़ित रामानुज, कैलाश, मधुबन, शिवकुमार, लाली, खेलौना देवी, गौरी शंकर आदि का कहना है कि दरवाजे और घर में चढ़ा हुआ पानी बुधवार को थोड़ा कम जरूर हुआ है, लेकिन समस्या बढ़ गई है। घर के सामने लगा हैंडपंप दूषित पानी दे रहा है। खासी, सर्दी, बुखार, पेट दर्द की बीमारियों ने भी पांव पसारना शुरू कर दिया है। छप्पर गिर गए हैं, उनकी जगह दूसरा छप्पर बनाना मुश्किल होगा। घर में रखा आटा, चावल भींग कर खराब हो गया है। पशुओं को खिलाने के लिए रखे गए भूसे में पानी पहुंचने के कारण सड़ने लगा है। शासन-प्रशासन के जरिए अभी तक कोई मदद नहीं दी गई है। न तो स्वास्थ्य विभाग की टीम ही मौके पर आई है। इसके अलावा दवा आदि का छिड़काव भी नहीं हुआ है।
18 गांवों के इक्कीस सौ परिवार बाढ़ से प्रभावित
धनघटा।
एसडीएम रमेश चंद्र ने कहा कि तहसील क्षेत्र के 18 गांवों के 2100 परिवार बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इनमें 50 परिवार को बुधवार के दिन राहत पैकेट वितरित किया गया। शेष 2100 परिवार को राहत सामग्री देने के लिए डिमांड भेजी गई है।
एसडीएम ने बताया कि कुर्मियान टोला, अगापुर उर्फ गुलरिहा, पटौवा, खालेपुरवा, पहलवान की कुटी, गायघाट, कटहा, खैरागाड, ढोल बजा, चकदहा, भौवापार, गुनवतियां, सियाराम अधिन सिंह, सरैया, खड़कपुर, कंचनपुर, करनपुर, सियरकला गांव बाढ़ के कारण चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। रास्ते भी आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं। आवागमन के लिए 39 नावें लगाई गई हैं। बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ढोल बाजा में पहुंचकर जरुरतमंदों को दवाइयां वितरित की। 50 लोगों में राहत सामग्री वितरित की गई। शेष लोगों को शीघ्र सामग्री वितरित कर दी जाएगी।
राहत सामग्री न मिलने से बाढ़ पीड़ितों ने किया प्रदर्शन
धनघटा। बाढ़ की त्रासदी झेल रहे कंचनपुर, गुनवतिया, चकदहा, गायघाट दक्षिणी के बाढ़ पीड़ितों ने बुधवार को तिघरा कुटी पर प्रदर्शन करके प्रशासन पर पीड़ितों की मदद न करने का आरोप लगाया।
बाढ़ पीड़ित राम शंकर, राधेश्याम, लालचंद, इंद्रजीत, ईश्वर, रामसूरत, दयाराम, शिव मूरत, हरीश आदि का आरोप था कि इस वर्ष यहां के लोग चौथी बार बाढ़ की त्रासदी का सामना कर रहे हैं। खेतों में खड़ी फसल बाढ़ के कारण बर्बाद हो चुकी है। नदी की कटान से जमीनें नदी में समाहित हो चुकी है। अब की बार आई बाढ़ ने सभी को परेशान किया है। लोग खाने के मोहताज हैं। प्रशासन के लोग यहां आकर केवल मदद के आश्वासन दे रहे हैं। अभी तक एक भी रुपये की मदद नहीं मिली है, जिससे परेशान लोगों का भरोसा प्रशासन से उठता जा रहा है।