कुढ़फतेहगढ़ क्षेत्र के गांव गुरसरी में छुट्टा से परेशान किसानों ने रविवार की रात उन्हें प्राथमिक विद्यालय परिसर में बंद कर ताला लगा दिया। सुबह छोटे गेट से बच्चों विद्यालय पहुंचे और छुट्टा पशुओं के कारण बच्चे कक्षाओं में कैद होकर रह गए। इंचार्ज अध्यापिका ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस व शिक्षिकों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। ग्राम प्रधान ने गोशाला के लिए जमीन चिह्नित कराने का आश्वासन देकर ग्रामीण को मनाया। सोमवार की सुबह नौ बजे ग्रामीणों ने स्कूल का गेट खोलकर छुट्टा पशुओं को बाहर निकाला।
गांवों में छुट्टा पशुओं द्वारा किसानों की फसलें बर्बाद की जा रही है जिससे किसान आजिज आ चुके हैं। रविवार की रात आठ बजे गांव गुरसरी के किसानों ने 20 छुट्टा पशुओं को प्राथमिक विद्यालय परिसर में बंद कर दिया। रातभर छुट्टा पशु विद्यालय परिसर में इधर-उधर घूमते रहे। सोमवार को बच्चे सुबह सात बजे विद्यालय पहुंचे।
विद्यालय का बड़ा गेट बंद होने पर छोटे गेट से प्रवेश कर बच्चे अपनी-अपनी कक्षाओं में जाकर बैठ गए। विद्यालय परिसर में पशुओं से भयभीत बच्चे अपनी-अपनी कक्षाओं से बाहर नहीं निकले और कक्षाओं में ही कैद होकर रह गए। सुबह पौने आठ बजे अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं व इंचार्ज अध्यापिका रितिका ने छुट्टा पशुओं बाहर निकालने का प्रयास किया तो ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। इस पर इंचार्ज अध्यापिका रितिका ने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने पहुंचकर शिक्षिकों के साथ ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। मगर ग्रामीण नहीं माने। बाद में पहुंचे ग्राम प्रधान राजेंद्र सिंह कश्यप ने शीघ्र ही गांव में गोशाला के लिए जमीन को चिह्नित करने का आश्वासन दिया जिसमें छुट्टा पशुओं को रखा जाएगा। तब ग्रामीणों ने सुबह नौ बजे विद्यालय गेट पर लगा ताला खोलकर छुट्टा पशुओं को बाहर निकाला।
प्रशासन तक आवाज पहुंचाने के लिए बंद किए छुट्टा पशु
गांव गुरसरी के ग्रामीण चंचल सिंह, मनोज कुमार, अतुल कुमार, अमित कुमार, बिजेंद्र, राजेंद्र सिंह चौधरी, विशन लाल, अनेक सिंह, जयवीर सिंह ने बताया कि गांव में गन्ने का रकबा ज्यादा है। छुट्टा पशुओं द्वारा ज्यादातर गन्ने की फसल बर्बाद की जा रही है। पिछले काफी समय से अधिकारियों व गांव प्रधान से शिकायतें कर चुके हैं। मगर कोई सुनवाई नहीं की गई। रविवार की रात पशुओं को विद्यालय में बंद करने का मकसद केवल इतना ही रहा कि उनकी आवाज प्रशासन तक पहुंच सके। ताकि प्रशासन गोशाला बनवाकर उसमें छुट्टा पशुओं को रखे।
रविवार की रात ग्रामीणों ने करीब 20 छुट्टा पशुओं को प्राथमिक विद्यालय में बंद कर दिया। सोमवार की सुबह गोशाला की जमीन चिह्नित कराने के आश्वासन पर ग्रामीणों ने सुबह नौ बजे विद्यालय का गेट खोलकर पशुओं को बाहर निकाल दिया।
-राजेंद्र सिंह कश्यप, ग्राम प्रधान, गांव गुरसरी।