हमारे पास अन्य कोई जगह नहीं थी इसलिए घर में ही साधु संतों ने विधिवत पूजन कर उन्हें समाधि दिलाई। सुनील ने बताया कि उनके पिता अशोक कुमार बाबा गोरखनाथ के पुजारी थे। इसलिए पिता ने घर में छोटा सा मंदिर बनाया था। काफी लोग पूजा व उपचार के लिए उनके पास आते थे। पिता काफी समय से नेत्रहीन थे।
वह कहते थे कि जब उनकी शरीर साथ छोड़ दे तो अंतिम संस्कार करने के बजाए समाधि बना दी जाए। उन्हें बुखार आया था और करीब 15 दिन पहले डेंगू की पुष्टि हुई थी। इसके चलते बुधवार की सुबह उनका निधन हो गया था। पिता की अंतिम इच्छा को पूरी करने के लिए गोरखनाथ पंथ के साधु संतों को बुलाया गया था। उन्होंने ही विधिवत रूप से पिता को समाधि दिलाई।
हम चार भाई हैं, किसी ने भी उनके शव को हाथ नहीं लगाया। उनके पंथ के लोगों ने विधिवत से समाधि की प्रक्रिया को पूरा कराया। इस पूरे घटना क्रम की वीडियोग्राफी भी कराई गई। घर में समाधि बनाने की चर्चा फैली तो पुलिसकर्मी भी पंचशील कॉलोनी पहुंचे। पुलिस का कहना है कि कॉलोनी में किसी ने इसकी शिकायत नहीं की तो सिपाही लौट आए। सीओ डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी है।
आसपास के लोगों को नहीं कोई एतराज
पंचशील कॉलोनी में घर के अंदर समाधि बनाए जाने के बाद बुधवार को किसी ने भी एतराज नहीं किया। न ही किसी ने विरोध किया है। आसपास के लोगों का कहना था कि वह उन्हें संत मानते थे। उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।