मास्टर्स इन वीमेन स्टडीज कोर्स
- फोटो : demo pic
कई साल पहले गुन्नौर क्षेत्र की एक युवती प्रेम जाल में फंस गई। हालात कुछ ऐसे बने कि उसी आत्महत्या करनी पड़ी। इस घटना ने माता पिता की सोच को बदलकर रख दिया। अपनी ही लाड़ली बेटियों को स्कूल नहीं भेजा। छोटी बेटी का पढ़ाई के प्रति जज्बे का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 15 वर्षीय एक किशोरी मम्मी के पर्स से सौ रुपये निकालकर चंदौसी आ गई। पतरौआ गांव में युवतियों को सिखाने पढ़ाने की खबर पढ़कर वह बस्ता लेकर संगीता भार्गव के पास पहुंच गई।
हालांकि जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में मामला आने के बाद उसे उसके परिजनों को इस शर्त के साथ भेजा गया कि उसे वह पढ़ाएंगे। वह नन्हीं परी से किशोरवय बाला स्काउट गाइड के डिस्ट्रिक हेडक्वार्टर कमिश्नर संगीता भार्गव के एबीसी मांटेसरी विद्यालय पहुंच गई। गेट पर बैठकर फफक फफक पर रोने लगी। सभी से यही कह रही थी कि उसे संगीता दीदी से मिलना है।
आखिरकार संगीता भार्गव ने उसे अपने पास बुलाकर हालचाल पूछा तो वह बोली उसके मां शिक्षिका हैं, उसके पिता भी पहले स्कूल चलाते थे लेकिन उसे पढ़ा नहीं रहे हैं, वह पढ़ना चाहती हैं। वह उसे अपने पास रख लें, घर नहीं जाएंगी, उसे पढ़ना है। संगीता भार्गव ने जिलाधिकारी एनकेएस चौहान व पुलिस अधीक्षक अतुल सक्सेना को पूरा माजरा बताया। महिला पुलिस कर्मी यहां पहुंचे। बालिका के माता पिता को व अन्य रिश्तेदारों को बुलाया गया।
परिजनों को इस शर्त पर सौंपा गया कि वह उसे पढ़ाएंगे। पुलिस प्रशासन बीच बीच में इसकी जानकारी करता रहेगा। इस दौरान माता पिता के उसकी पढ़ाई के खिलाफ होने की जो सच्चाई सामने आई, वह चौंकाने वाली थी।
उसके माता पिता बालिका की बड़ी बहन को पढ़ा रहे थे, कालेज में ही उसका एक युवक से प्रेम प्रसंग हो गया। उसने भी धोखा दिया तो उसकी बड़ी बहन ने आत्महत्या कर ली। तभी से उसके माता पिता ने बेटियों को स्कूल नहीं भेजने का संकल्प ले लिया, कहीं उनकी दूसरी बेटियों के साथ ऐसा न हो सके। इसलिए उन्होंने शेष अपनी दोनों बेटियों को स्कूल नहीं भेजा।