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अतीत में मंदिर होने के कई प्रमाण, तीन जुलाई को खुलेगी सर्वे रिपोर्ट : कोर्ट कमिश्नर

Tue, 20 May 2025 11:25 PM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
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संभल।
जामा मस्जिद में अतीत में हरिहर मंदिर होने के कई प्रमाण हैं। तीन जुलाई को कोर्ट में सर्वे रिपोर्ट खुलेगी तो हकीकत सामने आ जाएगी। यह बात कोर्ट कमिश्नर रमेश सिंह राघव ने कही है। हाईकोर्ट ने जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी की वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें सर्वे के आदेश को गलत बताते हुए इस पर रोक लगाने के लिए मांग की गई थी।
अब चंदौसी स्थित सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में तीन जुलाई को सुनवाई होगी। कोर्ट कमिश्नर का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में पेश की गई थी। सुनवाई के दौरान वह रिपोर्ट खुलेगी और जो प्रमाण मंदिर होने के मिले हैं। वह सामने आ जाएंगे।
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सूत्राें के अनुसार सर्वे रिपोर्ट करीब 45 पेज की है। कोर्ट कमिश्नर द्वारा दो जनवरी को अदालत में सील बंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश की थी। इसमें जामा मस्जिद परिसर की वीडियोग्राफी और फोटाे भी शामिल किए गए थे। इसमें जामा मस्जिद के मुख्य द्वार से लेकर अंदर परिसर के कई हिस्सों में मंदिर होने के प्रमाण होने का दावा किया गया है। इसमें मुख्य द्वार पर द्वारपाल होने का उल्लेख रिपोर्ट में लिखे जाने की चर्चा है। हालांकि इसकी पुष्टि कोर्ट कमिश्नर भी नहीं कर रहे हैं लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह तथ्य रिपोर्ट में शामिल हैं।
इसके अलावा 50 से ज्यादा कमल फूल के निशान और कलाकृतियां मिली हैं। अंदर दो वट वृक्ष हैं। हिंदू धर्म में वट वृक्ष की पूजा की जाती है। एक कुआं है, उसका आधा हिस्सा मस्जिद के अंदर और आधा हिस्सा बाहर है। सूत्रों का कहना है कि बनावट ही यह दर्शाती है कि यह अतीत में मंदिर था। हिंदू पक्ष ने दावा करते हुए लिखा था कि बाबरनामा में उल्लेख मिलता है कि 1526 में मस्जिद बनाने के लिए एक मंदिर को ध्वस्त किया गया था। इसकी बनावट को बदला जरूर है लेकिन प्रमाण अभी भी जिंदा है।
19 नवंबर को किया गया था सर्वे का आदेश

- 19 नवंबर 2024 को चंदौसी जिला अदालत में स्थित सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने हिंदू पक्ष की ओर से हरिहर मंदिर होने का दावा स्वीकार करते हुए सर्वे का आदेश किया था। कोर्ट कमिश्नर अधिवक्ता रमेश सिंह राघव को नियुक्त किया था। कोर्ट कमिश्नर 19 नवंबर की शाम को ही सर्वे के लिए पहुंच गए थे। डीएम और एसपी की मौजूदगी में पहले दिन सर्वे किया गया था लेकिन सर्वे पूरा नहीं होने की बात रमेश सिंह राघव ने कही थी। इसके बाद 24 नवंबर को यह सर्वे पूरा हुआ था।
सर्वे के दौरान हुआ था बवाल, पांच की गई थी जान, 29 पुलिसकर्मी हुए थे घायल
- जामा मस्जिद सर्वे के दौरान भीड़ एकत्र हुई थी और बवाल हो गया था। फायरिंग के साथ आगजनी और तोड़फोड़ की गई थी। इसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी। जबकि 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। यह बवाल नखासा तिराहा, हिंदूपुरा खेड़ा और दीपासराय तक पहुंचा था। हालांकि करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस इस बवाल को काबू करने में सफल रही थी। 24 नवंबर की सुबह करीब 10 बजे तक हुए सर्वे के बाद टीम को पुलिस ने सुरक्षित रास्ते से बाहर निकाला था।
जामा मस्जिद कमेटी सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी
- 24 नवंबर को हुए बवाल के बाद जामा मस्जिद की इंतजामिया कमेटी सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। याचिका दायर सर्वे पर रोक लगाने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत की कार्रवाई को रोकते हुए हाईकोर्ट को सुनवाई करने के लिए आदेश किया था। इसके बाद अलग-अलग समय में सुनवाई की गई। जामा मस्जिद कमेटी की सर्वे पर रोक लगाने वाली याचिका अब खारिज कर दी गई है।
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जामा मस्जिद को लेकर अदालत में कब क्या हुआ
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19 नवंबर 2024- हिंदू पक्ष ने चंदौसी कोर्ट में दावा किया, सर्वे के लिए अनुमति मिली और 19 नवंबर को सर्वे भी किया गया।

24 नवंबर- सर्वे करने के लिए टीम जामा मस्जिद पहुंची, इसी दौरान बवाल हो गया था।

2 जनवरी 2025- सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत में कोर्ट कमिश्रर ने सर्वे रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की।

3 जनवरी- जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने सुप्रीम में सर्वे पर रोक लगाने की याचिका दायर की।

8 जनवरी- सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट ने निचली के आदेश पर रोक लगाई

19 मई- हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की सर्वे पर रोक लगाने वाली याचिका खारिज कर दी है।



कोट
- सर्वे रिपोर्ट खुलने पर सारी हकीकत सामने आ जाएगी। तीन जुलाई को सुनवाई होनी है। यह सर्वे रिपोर्ट गोपनीय है। इसलिए इसके बारे में नहीं बताया जा सकता। बस इतना ही कहा जा सकता है कि अतीत में मंदिर होने के प्रमाण मिले हैं।- रमेश सिंह राघव, कोर्ट कमिश्नर जामा मस्जिद सर्वे
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