धनारी। भले ही फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर जगा जुर्माना और एफआईआर वापस ले लिए गए हों पर अभी भी किसानों को अवशेष नहीं जलाने दिए जाएंगे। इसकी निगरानी की जिम्मेदारी लेखपालों की टीम को सौंपी गई है। जिन गांवों में अवशेष जलाने के मामले सामने आए है, वहां वॉल पेंटिंग और गोष्ठी के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जाएगा। लेखपालों की टीम पहले की तरह ही खेतों पर अवशेष जलाने वालों पर नजर रखेंगी। संभल जनपद में 40 हजार हेक्टेअर में धान की फसल होती है। इसमें से करीब दो फीसदी लगभग 800 हेक्टेअर धान की कटाई ही मशीन से होती है, शेष धान की फसल की हाथ से कटाई होती है। अवशेष से साथ खेतों से निकली पुआल को किसान जला देते हैं। खेतों पर फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। अवशेष के खाद बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इस पर शासन पूरी सख्ती दिखा रहा है।
सेटेलाइट से फसल अवशेष जलाने वालों पर नजर रखी जा रही है। जो किसान फसल अवशेष जलाते हैं, उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने व जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही किसान कृषि विभाग की सभी योजनाओं में अपात्र घोषित किया जाता है।
कृषि विभाग किसानों को फसल अवशेष जलाने की बजाए खेत में उन्हें गलाकर खाद बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फसल अवशेष जलाने में किसानों पर दर्ज एफआईआर वापस करा दी थी और उन पर लगे जुर्माने भी लौटाने के आदेश दिए थे। जुर्माने और एफआईआर से राहत मिलने के बाद भी फसल के अवशेष जलाने की किसी को अनुमति नहीं रहेगी।
अवशेष जलाने से रोकने के लिए गांवों में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। अक्टूबर माह में धान की फसल की कटाई शुरू हो जाएगी। लेखपालों की टीम खेतों में फसल अवशेष जलाने वाले पर नजर रखेगी। जिले में 30 किसानों पर फसल अवशेष जलाने का जुर्माना लग चुका है।