संभल। जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली एडवोकेट की जमानत पर बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हो सकती है। वह 23 मार्च से जेल में बंद हैं। उन पर बवाल की साजिश रचने और गंभीर अपराध में झूठे बयान देने के आरोप में घिरे हैं। उनके खिलाफ पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद का सर्वे किया जा रहा था। इसी दौरान भीड़ एकत्र हुई और बवाल हो गया था। इसमें पांच लोगों की जान गई थी। और 29 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। भीड़ ने तोड़फोड़ कर आगजनी की थी। इसमें लाखों रुपये का नुकसान हुआ था।
बवाल की जांच के लिए एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने एसआईटी गठित की थी। एसआईटी ने जांच के दौरान जामा मस्जिद कमेटी के सदर को बवाल की साजिश रचने का आरोपी माना था। उन पर आरोप था कि उन्होंने 23 नवंबर की रात को सर्वे होने की जानकारी सांसद जियाउर्रहमान बर्क को दी थी। इसके बाद सांसद के कहने पर भीड़ एकत्र करने में भी उनकी भूमिका थी। चार महीने की जांच के बाद उनकी गिरफ्तारी की गई थी। कई बार एसआईटी ने बयान दर्ज करने के लिए बुलाया था।
23 मार्च को भी बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया था। इसके बाद ही उनकी गिरफ्तारी कर ली थी। तब से ही वह मुरादाबाद की जेल में बंद हैं। सेशन कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद परिजन हाईकोर्ट गए थे। 24 जुलाई यानि आज हाईकोर्ट में जमानत पर सुनवाई हो सकती है।