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1978 में हुए दंगों से भयभीत हो गए थे परिवार, इसलिए छोड़ा मोहल्ला : विष्णु शरण रस्तोगी

Mon, 16 Dec 2024 02:03 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
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संभल। 1978 का दंगा दहला देने वाला था। कई लोगाें की जान गई थीं और इससे भय का माहौल बन गया था। 40 रस्तोगी परिवार रहते थे इसमें ज्यादातर कारोबारी थे। इसलिए पलायन करना पड़ा। कई परिवार ऐसे थे जिनके पास किराए पर रहने की भी स्थिति नहीं थी, उन्हें हमने रहने के लिए व्यवस्था की थी। उस समय मंदिर को बंद किया गया था। यह कहना है नगर हिंदू महासभा के संरक्षक विष्णु शरण रस्तोगी का।
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82 वर्षीय विष्णु शरण रस्तोगी का पुश्तैनी मकान 1978 तक नगर के खग्गू सराय में हुआ करता था। सभी 40 परिवार रस्तोगी थे। जोविष्णु शरण रस्तोगी के परिवार के थे। इसी परिवार का शिवमंदिर है जो अब 46 वर्ष बाद खुला है। विष्णु शरण रस्तोगी ने बताया कि 1978 में अचानक से दंगा हुआ था। इसमें कई हिंदू समाज के लोगों की जान गई थी। इससे उन इलाकों में ज्यादा भय था जहां हिंदू आबादी कम थी और मुस्लिम आबादी ज्यादा थी। इसमें खग्गू सराय भी ऐसा ही इलाका था जहां हिंदू 40 परिवार थे और मुस्लिम बड़ी संख्या में थे। इसलिए हिंदू परिवारों ने पलायन करना ही सही निर्णय माना। इसलिए मोहल्ला ठेर, कोटपूर्वी जैसे हिंदू आबादी वाले इलाके में जाकर बस गए। जब हिंदू परिवार नहीं रहे तो मंदिर पर ताला लगाना पड़ा था।

कई परिवारों ने मजबूरी में छोड़ा था अपना मकान, बेचा भी बाद में
विष्णु शरण रस्तोगी ने बताया कि कई ऐसे भी परिवार थे जिनके पास किराए पर रहने की भी स्थिति नहीं थी। उन परिवारों को उन्होंने जगह दी। इसके बाद वह जब उन्होंने अपने मकान बेचे तो दूसरे इलाके में घर ले सके। बताया कि दंगे के समय मकान से महत्वपूर्ण अपनी जान थी इसलिए लोगों ने खग्गू सराय से पलान करना ही बेहतर समझा था।
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मुख्यमंत्री ने किया संभल के मंदिर और दंगे का जिक्र
एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभल में 46 वर्ष बाद खुले शिव मंदिर और 1978 दंगों का जिक्र किया है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि 46 वर्ष पहले जिस मंदिर को बंद कर दिया गया था। अब वह प्राचीन मंदिर खुला है। 1978 में दंगे के दौरान निर्दोष लोगों की निर्मम हत्या की गई थी। उन हत्यारों को सजा क्यों नहीं मिली। विपक्ष को घेरते हुए कहा कि संसद में संभल के 24 नवंबर को हुए बवाल की चर्चा की जाती है लेकिन 46 वर्ष पहले संभल में ही हुए नरसंहार की चर्चा कोई नहीं करता।
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