वंश गोपाल तीर्थ पर श्रीमद् भागवत गीता में प्रमाण दिखाते महंत स्वामी भगवत प्रिय महाराज। संवाद
संभल। कलियुग में भगवान श्री कल्कि का जन्म वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को होगा, यह ठीक है लेकिन कंबोज नगर (ऐंचोड़ा कंबोह) में होगा, यह गलत है। क्योंकि श्रीमद्भागवत गीता, या कल्कि पुराण में भगवान कल्कि के अवतार की जो रचना की गई है, उसमें कंबोज नगर का कहीं जिक्र ही नहीं है। इसलिए यह सिर्फ भ्रामक है। यह कहना है कि श्री वंश गोपाल कल्किधाम बेनीपुर चक के महंत स्वामी भगवत प्रिय महाराज का।
प्राचीन श्री वंश गोपाल कल्किधाम तीर्थ वही तीर्थ है, जहां भगवान श्री कृष्ण द्वापर में रुक्मिणी के साथ आए थे और कदम के वृक्ष नीचे ठहरे। तभी उन्होंने कलियुग में भगवान कल्कि का अवतार लेकर इसी संभल में आने की बात कही थी। मंदिर के महंत स्वामी भगवत प्रिय महाराज ने श्रीमद्भागवत गीता के द्वादश स्कंद का जिक्र किया और बताया कि इसमें 16 से 20 श्लोक तक श्री कल्कि भगवान के अवतार की रचना वेदव्यास जी ने की है।
इन सभी श्लोक में कंबोजनगर शब्द ही नहीं है। सिर्फ संभल ग्राम का उल्लेख हुआ है। ऐसे में कंबोज नगर में जन्म होगा, यह मान लेना सही नहीं है। इस पर हम भी आपत्ति करते हैं। इस पर किसी को शास्त्रार्थ करना है तो वह तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि भगवान कल्कि की अवतरित स्थली की तलाश में उन्होंने दीक्षा लेने के बाद से ही खोजबीन की थी।
इस दौरान उड़ीसा, बिहार, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तिब्बत आदि स्थानों की यात्रा की और प्रमाण देखने का प्रयास किया पर नहीं मिले। बाद में यूपी के इस संभल में आए तो यहां प्रमाण मिले।