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Sambhal News: कोर्ट ने आदेश जारी कर बाल विवाह को रोका, जिले में पहली प्रभावी कार्रवाई

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संभल। बाल विवाह मुक्त भारत के अभियान को मजबूत करते हुए संभल जिले में महत्वपूर्ण कानूनी जीत हासिल हुई है। सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/एसीजेएम पराग यादव ने जिले का पहला इंजंक्शन (निषेधाज्ञा) आदेश जारी करते हुए एक प्रस्तावित बाल विवाह को पूरी तरह रोक दिया है। आदेश के तहत यदि कोई भी व्यक्ति बाल विवाह कराता है या उसमें सहयोग करता है तो बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अनुसार दो वर्ष तक की सश्रम कारावास और एक लाख रुपये तक का जुर्माना (या दोनों) की सजा का सामना करना पड़ सकता है।
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धनारी थाना क्षेत्र के किशोर का बाल विवाह फरवरी में तय था। सरकार के 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त अभियान के दौरान जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन की सहयोगी प्रयत्न संस्था द्वारा चलाए जा रहे बाल विवाह मुक्ति रथ अभियान से प्रेरित होकर किशोर ने स्वयं जेआरसी की राष्ट्रीय हेल्पलाइन पर संपर्क किया और विवाह रुकवाने की अपील की। प्रयत्न संस्था के प्रभारी गौरीशंकर चौधरी ने किशोर की मां की ओर से कोर्ट में आवेदन दाखिल कराया।
दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद जज पराग यादव ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 13(6) के तहत अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जब तक लड़का 21 वर्ष और लड़की 18 वर्ष की कानूनी उम्र प्राप्त नहीं कर लेती, तब तक उनका विवाह नहीं किया जा सकता। यह निषेधाज्ञा केवल दूल्हा-दुल्हन तक सीमित नहीं है बल्कि बाल विवाह के आयोजन में शामिल सभी व्यक्तियों पर लागू होता है। इनमें शादी कराने वाले पंडित या मौलवी, नाई, हलवाई, टेंट वाले, बैंड पार्टी, फोटोग्राफर, अन्य सेवा प्रदाता, आयोजक, परिवारजन, गवाह तथा शादी में दावत खाने वाले लोग हैं। बताते चलें कि यह जिले का पहला ऐसा आदेश है जो बाल विवाह को रोकने में अहम है।
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डीएम और एसपी ने रवाना किया था रथ

संभल। डीएम और एसपी ने पूर्व में प्रयत्न संस्था के बाल विवाह मुक्ति रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह गांव-गांव जाकर जागरूकता फैला रहा है। इसी अभियान ने विजय को आगे आने के लिए प्रेरित किया।
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