शासन के आदेश पर सरकारी जमीनों से अवैध कब्जा हटाने का कार्य जारी है। इसक्रम में संभल तहसील क्षेत्र के मोहम्मदपुर भंडा गांव में चारागाह की जमीन पर हुए कब्जे को राजस्व टीम ने बुधवार को मुक्त कराया। इस दौरान जमीन को जुतवाकर उसे खंड विकास अधिकारी को अस्थायी पशुशाला का निर्माण कराने के लिए सौंपा गया। जमीन से कब्जा हटने पर तहसीलदार ने सात लोगों के विरुद्घ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पुलिस को तहरीर दी। इसमें नामजद किए गए लोगों पर सरकारी कार्य में बाधा डालने और धमकी देने का आरोप लगाया गया है।
मोहम्मदपुर भंडा गांव में चारागाह की जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर निर्माण कराने के साथ फसल की बुआई की थी। इस बात की जानकारी होने पर एसडीएम के आदेश पर तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व विभाग जमीन की पैमाईश की। नापी में अवैध कब्जा पाए जाने पर अवैध कब्जेदारों को जमीन खाली कराने की सूचना दी गई। साथ ही राजस्व और पुलिस की टीम ने संयुक्त रुप से लाउडस्पीकर से इसको एनाउंस किया था। इस दौरान जमीन पर कब्जा करने वालों ने प्रशासन से एक सप्ताह का समय मांगा था। लेकिन इस दरम्यान जमीन से कब्जा नहीं हटाया। समय सीमा पूरा होने पर बुधवार को तहसीलदार मनोज कुमार सिंह के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम मोहम्मदपुर भंडा गांव पहुंची, इस दौरान पुलिस की मौजूदगी में टीम ने ट्रैक्टर चलाकर पूरी जमीन को जुतवा कर कब्जा मुक्त कराया। खाली हुई जमीन को तहसीलदार ने खंड विकास अधिकारी को सौंपकर उसमें अस्थाई गोशाला बनाने का आदेश दिया। तहसीलदार मनोज कुमार सिंह ने बताया कि मोहम्मदपुर भंडा गांव स्थित चारागाह की जमीन पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर फसल आदि उगाने का कार्य किया था। जमीन को खाली करा लिया गया है। इस दौरान राजस्व टीम के कार्य में बाधा डालने का प्रयास करने वालों के विरुद्घ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पुलिस को तहरीर दी गई है। साथ ही जमीन पर अस्थाई पशुशाला का निर्माण करने के लिए खंड विकास अधिकारी दी गई है।
इन सात के नाम से लेखपाल ने दी पुलिस को तहरीर
चारागाह की जमीन पर हुए अवैध कब्जे को हटवाने के लिए एसडीएम के आदेश पर क्षेत्रीय लेखपाल वरुण सक्सेना ने जमीन की पैमाईश की थी। इस दौरान जमीन पर कब्जा करने वालों ने लेखपाल को धमकियां दी, साथ ही पैमाईश कार्य को रोकने का प्रयास किया था। बुधवार को कब्जा हटने पर तहसीलदार के आदेश पर लेखपाल ने रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पुलिस को प्रार्थना पत्र सौंपा। इसमें गांव के शंकर, मदनलाल, सोमपाल, भगवान सहाय, वेगराम व त्रिलोकी को आरोपित कर उन पर धमकी देने और सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप लगया गया है।