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Sambhal News: संभल शहर में चौकसी के साथ बढ़ी जामा मस्जिद की निगरानी

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संभल। जामा मस्जिद सर्वे पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका खारिज होने के बाद संभल में एहतियाती तौर पर चौकसी बढ़ा दी गई है। एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने फोर्स के साथ शहर में पैदल मार्च किया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। साथ ही कहा कि यदि कोई माहौल खराब करने का प्रयास करता है तो पुलिस को सूचना दें, जिससे सख्त कार्रवाई की जा सके।
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एसपी का कहना है कि जामा मस्जिद पर निगरानी बढ़ाने के लिए अधिनस्थों को निर्देश दिए हैं। सत्यव्रत पुलिस चौकी में पर्याप्त फोर्स तैनात पहले से है। पीएसी और आरआरएफ की कंपनी भी शहर में एहतियाती तौर पर तैनात हैं। मामला कोर्ट में है, इसलिए सभी को शांति बनाए रखनी चाहिए। यदि कोई माहौल खराब करने का प्रयास करेगा तो सख्ती से निबटा जाएगा।
19 नवंबर 2024 को चंदौसी जिला अदालत में स्थित सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में हिंदू पक्ष की ओर से हरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए सर्वे कराए जाने के लिए वाद दायर किया था। इसमें सिविल जज सीनियर डिवीजन की ओर से आदेश किए। साथ ही कोर्ट कमिश्नर अधिवक्ता रमेश सिंह राघव को नियुक्त किया था। कोर्ट कमिश्नर 19 नवंबर की शाम को ही सर्वे के लिए पहुंच गए थे। डीएम और एसपी की मौजूदगी में पहले दिन सर्वे किया गया था लेकिन सर्वे पूरा नहीं होने की बात रमेश सिंह राघव ने कही थी।
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इसके बाद 24 नवंबर की सुबह में सर्वे शुरू किया गया था। इसी दौरान भीड़ एकत्र हुई और बवाल हो गया था। फायरिंग के साथ आगजनी और तोड़फोड़ की गई थी। इसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी। जबकि 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। 24 नवंबर की सुबह करीब 10 बजे तक हुए सर्वे के बाद टीम को पुलिस ने सुरक्षित रास्ते से बाहर निकाला था।
यह सर्वे रिपोर्ट कोर्ट कमिश्नर द्वारा 2 जनवरी 2025 को अदालत में सील बंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश की थी। इसमें मस्जिद परिसर की वीडियोग्राफी और फोटाे भी शामिल किए गए थे। हिंदू पक्ष की ओर से दावा किया गया था कि मंदिर होने के प्रमाण मिले हैं।
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जामा मस्जिद कमेटी सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी
24 नवंबर को हुए बवाल के बाद जामा मस्जिद की इंतजामिया कमेटी सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। याचिका दायर सर्वे पर रोक लगाने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत की कार्रवाई को रोकते हुए हाईकोर्ट को सुनवाई करने के लिए आदेश किया था। इसके बाद अलग-अलग समय में सुनवाई की गई। जामा मस्जिद कमेटी की सर्वे पर रोक लगाने वाली याचिका अब खारिज कर दी गई है।
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बाबरनामा में संभल का जिक


हिंदू पक्ष की ओर से दावा किया गया था कि 1526 में मस्जिद बनाने के लिए एक मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था। इसका उल्लेख बाबरनामा में होने का हवाला भी दिया गया था। संभल की शाही जामा मस्जिद दक्षिण एशिया में सबसे पुरानी जीवित मुगल-युग की मस्जिद बताई जाती है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह हरिहर मंदिर था जो सदियों पुराना है। मंदिर ध्वस्त कराकर मस्जिद का रूप दिया गया था। सर्वे रिपोर्ट में भी यह दावा किया गया था कि मस्जिद में 50 से ज्यादा फूल, निशान और कलाकृतियां मिली हैं। अंदर दो वट वृक्ष हैं। हिंदू धर्म में वट वृक्ष की पूजा की जाती है। एक कुआं है, उसका आधा हिस्सा मस्जिद के अंदर और आधा हिस्सा बाहर है। कई तथ्य मंदिर होने के प्रमाण के रूप में पेश किए जाने की चर्चा है।
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जामा मस्जिद को लेकर अदालत में कब क्या हुआ-

19 नवंबर 2024- हिंदू पक्ष ने चंदौसी कोर्ट में दावा किया, सर्वे के लिए अनुमति मिली और 19 नवंबर को सर्वे भी किया गया।



24 नवंबर- दोबारा सर्वे करने के लिए टीम जामा मस्जिद पहुंची, इसी दौरान बवाल हो गया था।

2 जनवरी 2025- सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालत में कोर्ट कमिश्नर ने सर्वे रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की।

3 जनवरी- जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने सुप्रीम में सर्वे पर रोक लगाने की याचिका दायर की।



8 जनवरी- सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट ने निचली के आदेश पर रोक लगाई


19 मई- हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की सर्वे पर रोक लगाने वाली याचिका खारिज कर दी है।
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