संभल। जिले में कई ऐसे किसान हैं, जिन्होंने न सिर्फ मिट्टी और खेती से प्यार किया बल्कि, रसायनिक उर्वरकों से बंजर हुई भूमि को जैविक खेती के दम पर उपजाऊ बनाया।
जैविक खेती कर काला गेहूं से लेकर हल्दी तक की फसल उगाई है। जिसका स्वाद न सिर्फ लोगों को रास आ रहा है। बल्कि इस बदलाव से किसानों को लाखों रुपये की कमाई भी हो रही है। धरती के साथ लोगों की सेहत भी सुधर रही है।
पवांसा ब्लॉक क्षेत्र के अझरा निवासी नत्थू सिंह बताते हैं कि नीम, गोबर, गुड़, गोमूत्र, बेसन और तंबाकू मिलाकर जीवामृत और नीमास्त्र जैसी जैविक खाद अपने घर पर ही बना रहे हैं। इसके साथ ही वह घर पर ही वर्मी कंपोस्ट तैयार करके मिट्टी में मिलाते हैं, इससे पैदावार अच्छी होती है और उन्हें आर्थिक बचत होने लगी है। खास बात यह है कि जैविक अनाज की मांग भी बाजार में अब होने लगी है। जैविक खेती से उन्हें अब आर्थिक मजबूती मिलने लगी है। पिछली फसलों के मुकाबले आमदनी में भी इजाफा हुआ है।
चंदौसी के कैथल निवासी किसान अनिल दुबे ने एक दशक पहले जैविक खेती की शुरूआत की थी। अनिल दुबे ने बताया कि रसायनिक खाद काफी महंगे दामों पर मिलती है और इससे उनकी भूमि भी बंजर होने लगी थी। इसलिए उन्होंने जैविक खेती की तरफ कदम बढ़ाया। जिसके बाद काला गेहूं से लेकर सब्जियां तक उगाई हैं। आम, अमरूद, पपीता के पौधे लगाए। इनके फलों का स्वाद लोगों को खूब रास आ रहा है।
गुन्नौर के ईसमपुर डांडा निवासी किसान महाराज सिंह भी वर्ष-2018 से जैविक खेती कर रहे हैं। साथ ही आमदनी भी अच्छी हो रही है। उन्होंने वर्मी कंपोस्ट, जीवामृत और डी-कंपोजर के प्रयोग से अब तक गन्ना, आलू, गेहूं, लहसुन और सब्जियां उगाई हैं।
जिले में जैविक खेती करने के लिए लगातार किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों में अनुदान पर वर्मी कंपोस्ट इकाइयों का निर्माण कराया जा रहा है। वर्मी कंपोस्ट निर्माण इकाइयां जैविक खेती में मददगार होंगी।
हीरा सिंह जीना, उप कृषि निदेशक, संभल