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आमरण अनशन पर बैठी शहीद की पत्नी और मां समेत पांच की तबीयत बिगड़ी

Sun, 21 May 2017 01:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
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पनसुखा गांव में शहीद के परिजनों से मिलने पहुंचे सपा जिलाध्यक्ष व भाजपा जिलाध्यक्ष आपस में नोकझोंक करते। - फोटो : amar ujala
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 सीएम को पनसुखा मिलक बुलाने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठीं शहीद की मां, पत्नी समेत पांच की तबीयत शनिवार को दूसरे दिन बिगड़ गई। दोनों बेहोश हो गए थे, जबकि साथ बैठे ग्रामीण को सिरदर्द की शिकायत थी।
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सूचना के तकरीबन तीन घंटे बाद चिकित्सकों की टीम गांव पहुंची। इस बीच मां को तो होश आ गया था, जबकि शहीद की पत्नी बेहोश ही थी। टीम ने सभी का परीक्षण किया। सबका बीपी लो निकला, मुश्किल से शहीद की पत्नी को होश में लाया जा सका। लेकिन तीनों इलाज कराने से इंकार कर दिया। इधर, शाम तकरीबन छह बजे शहीद के पिता ब्रह्मपाल और चाचा चंद्रपाल की भी तबीयत बिगड़ गई थी।

अक्तूबर 2016 में राजौरी में पनसुखा मिलक निवासी सुधीश कुमार शहीद हो गए थे। इसके बाद सत्तारूढ़ दल और विपक्षी दलों के नेताओं ने गांव के विकास और परिजनों की मदद के तमाम दावे किए थे, मगर सात माह बाद भी वादे पूरे नहीं हुए। इस पर शुक्रवार को सीएम को बुलाने की मांग को लेकर शहीद की समाधि पर परिजनों समेत 12 ग्रामीण आमरण अनशन पर बैठ गए थे।
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जानकारी पर दूसरे दिन शनिवार को पहले एसडीएम राशिद अली खां, सीओ बीपी सिंह बालियान, बाद में जिला पंचायत सदस्य हरेंद्र सिंह, एसपी रवि शंकर छवि, एडीएम आरपी यादव भी मौके पर पहुंचे। अफसरों ने रविवार को मुरादाबाद में शहीद के दो परिजनों की सीएम से मुलाकात कराने का प्रस्ताव दिया, लेकिन वे सीएम को गांव बुलाने की मांग पर अड़े रहे।

इधर, दोपहर 12.00 बजे शहीद की पत्नी कविता देवी और मां हरवती की तबीयत बिगड़ गई। मां कुछ देर बाद होश में आ गईं, मगर शहीद की पत्नी को होश में नहीं लाया जा सका। वहीं एक ग्रामीण जिलेपाल को सिरदर्द की भी शिकायत थी। सपा जिलाध्यक्ष फिरोज खां की सूचना पर एसडीएम ने चिकित्सकों की टीम गांव भेजी। इस पर तीन बजे के बाद उसे होश में लाया जा सका। वहीं शाम छह बजे पिता ब्रह्मपाल और चाचा चंद्रपाल की भी तबीयत बिगड़ गई थी। 
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