अल्लाह की इबादत का मुकद्दस महीना रमजान चांद के दीदार के साथ शुरू हो गया। शनिवार को चांद नजर का दीदार हुआ। रविवार को मुस्लिम समाज के लोग पहला रोजा रखेंगे। वहीं, रमजान के शुरू होते ही पुरुष विशेष नमाज तरावीह को लेकर चर्चा करते रहे, तो घरों में महिलाएं इबादत के साथ ही सहरी और इफ्तार को लेकर चर्चाओं में मशगूल रहीं। मस्जिदों में तरावीह की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया।
यूं तो रमजान को लेकर मुस्लिम समुदाय में शुक्रवार से ही खुशी का माहौल था लेकिन चांद नजर नहीं आने से मायूस हुए। अब शनिवार को जब चांद नजर का दीदार हुआ तो मुस्लिम बहुल इलाकों में रौनक आ गई। मुफ्ती आलम रजा खां नूरी बताते हैं कि इस्लाम में रमजान का रोजा रखना हर मुसलमान पर फर्ज किया गया है। इसे बेवजह नहीं छोड़ा जा सकता। रमजान को तीन अशरों में बांटा गया है। पहला 10 दिन रहमत का, दूसरा दस दिन मगफिरत का और आखिरी 10 दिन जहन्नुम से आजादी का है। इस माह में अल्लाह ताला बंदों का खास रहमत फरमाता है। यही वजह है कि इस माह में एक फर्ज का सवाब सत्तर फर्ज के बराबर और एक नफ्ल का सवाब फर्ज के बराबर मिलता है।