चंदौसी। बिजली विभाग में एक नया गड़बड़झाला सामने आया है। बिल अधिक आने की शिकायत पर तीन साल पहले बिजली कर्मचारी बकाये के 1.07 लाख रुपये वसूल लिए और बिना हस्ताक्षर की फर्जी रसीद दे दी। दुकान से केबिल हटा दिया और मीटर उतारकर ले गए थे। अब उपभोक्ता ने ऑनलाइन कनेक्शन की जानकारी की, तो रिकार्ड में 7.79 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया प्रदर्शित हो रहा है। यह देखकर उपभोक्ता के होश उड़ गए। मामले की अधिकारियों से शिकायत की। विभाग में भी हड़कंप मचा है। अधीक्षण अभियंता ने मामले में कमेटी को जांच सौंपी है।
नरौली कस्बे के मोहल्ला पीपलवाला निवासी प्रेमशंकर ने बताया कि सैलून के लिए वर्ष 2014 में कॉमर्शियल बिजली का कनेक्शन लिया था। समय समय पर बिल जमा करते हैं, इसकी रसीदें उनके पास हैं। वर्ष 2018 में बिल अधिक आने पर मामले की शिकायत की गई थी। उस दौरान एक बिजली कर्मचारी घर पहुंचा तथा कनेक्शन कटवाने की सलाह दी। कर्मचारी ने एक लाख सात हजार 406 रुपये बिजली के बिल के बताये। आरोप है कि उन्होंने उसका भुगतान किया।
विद्युत वितरण खंड चंदौसी की ओर से विद्युत विच्छेदन स्लिप दी गई। इस स्लिप में बकाया धनराशि जमा करने का उल्लेख है। कुछ समय बाद विभाग का एक कर्मचारी मीटर उखाड़ कर ले गया। तब से दुकान में बिजली कनेक्शन नहीं है।
आरोप है कि कनेक्शन की ऑनलाइन जांच कराई गई, तो पता चला कि सात लाख 79 हजार 886 रुपये का बिजली का बिल बकाया है। मामले विभागीय कर्मचारी, जेई, एसडीओ से की गई, तो वह टालते रहें। शिकायत मिलने पर इस अधीक्षण अभियंता ने एक्सईएन को कमेटी गठित कर जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
80 माह में 7.79 लाख का बिल
पीड़ित प्रेमशंकर का कहना है कि वर्ष 2014 में बिजली कनेक्शन लिया था। तब से अब तक 80 माह का समय हुआ है। प्रत्येक माह का बिल औसतन दस हजार रुपये आ रहा है। जबकि वह बीच बीच में बिजली का बिल जमा करते रहे हैं, इसकी रसीदें भी उनके पास हैं। सैलून में पूरे महीने में औसतन 70 से 80 यूनिट ही बमुश्किल खर्च हो पाएगी।
दस हजार के बकाये पर विभाग का काट देता है, तो क्यों नहीं की पड़ताल
विभागीय अधिकारी अभियान के दौरान दस हजार रुपये का बिजली का बिल बकाया होने पर कनेक्शन काट देते हैं। ऐसे में प्रेमशंकर के ऊपर 7.79 लाख रुपये का बिजली का बकाया हो गया और कर्मचारियों ने एक बार भी बकायेदार को न तो नोटिस दिया और न ही उसके खिलाफ अन्य कार्रवाई की। इस मामले में विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही प्रतीत हो रही है।
मामला मेरे संज्ञान में आया है। विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता भी हो सकती है। इसकी जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। एक्सईएन चंदौसी को जांच सौंपी गई है।
आईपी सिंह, अधीक्षण अभियंता संभल।