सांसद जियाउर्रहमान बर्क के दीपा सराय स्थित आवास में एक से दो वर्ष पहले ही नवनिर्माण किया गया है। साथ ही यह निर्माण विनियमित क्षेत्र की स्वीकृत के बिना किया गया। इसका उल्लेख जांच रिपोर्ट में हुआ है। इस मामले में पांच अप्रैल को एसडीएम सुनवाई करेंगी। माना जा रहा है कि अवैध निर्माण के मामले में कार्रवाई होनी तय है।सांसद के आवास में हुए निर्माण की जांच करने के लिए विनियमित क्षेत्र और पीडब्ल्यूडी के जेई पहुंचे थे। दोनों इंजीनियर ने नवनिर्माण की नापतौल की। जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कितने वर्ग मीटर में निर्माण किया गया है। इस रिपोर्ट को मंगलवार को एसडीएम के समक्ष पेश किया जा चुका है। सूत्रों का कहना है कि निर्माण विनियमित क्षेत्र की स्वीकृति के बिना किया गया और एक से दो वर्ष पहले ही निर्माण किया गया है।
मालूम हो 11 दिसंबर 2024 को संभल नियत प्राधिकारी/उपजिलाधिकारी विनियमित क्षेत्र की ओर से सांसद को नोटिस जारी किया गया था। जिसमें कहा था कि सांसद ने अपने आवास में बिना अनुमति के नवनिर्माण कराया है। जिसका नक्शा पास नहीं है। यह उत्तर प्रदेश रेगुलेशन ऑफ बिल्डिंग ऑपरेशन एक्ट 1958 का उल्लंघन है। इस नोटिस के बाद कई बार जवाब दाखिल करने के लिए अवसर दिया गया। बाद में वास्तविक स्थिति को जानने के लिए इंजीनियर से निर्माण की नापतौल कराई गई।
कल को डीएम न्यायालय में होगी सुनवाई
- सांसद के आवास में हुए अवैध निर्माण मामले में सांसद के पिता ममलुकुर्रहमान बर्क ने डीएम न्यायालय में अपील दायर की है। इसमें सुनवाई शुक्रवार को की जानी है। सांसद के पिता ने अपील में कहा है कि जिस निर्माण को सांसद का बताया जा रहा है वह सांसद का नहीं है। बल्कि उनके मकान में निर्माण कार्य हुआ है। उनके पिता पूर्व सांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क के द्वारा कराया गया था। बताया कि उनके पिता के निधन के बाद संपत्ति उनके नाम दर्ज हो गई है। जबकि अवैध निर्माण बताते हुए नोटिस सांसद जियाउर्रहमान बर्क के नाम जारी कर दिया गया है। सांसद के पिता का कहना है कि नोटिस उनके नाम जारी किया जाए। जिससे वह अपना पक्ष रख सकें।