संभल/सिरसी/असमोली/ ओबरी। पैगंबर-ए- इस्लाम हजरत मोहम्मद (सअ) के दामाद और खलीफा हजरत अली की यौम-ए-पैदाइश जोश-खरोश के साथ मनाई गई। मंडी किशनदास सराय में जुलूस निकाला गया। सिरसी, बुकनाला, नूरियो सराय, इकरौटिया में भी महफिलें सजीं। जश्न मनाया गया।
मंडी किसानदास राय के इमामबाड़े से जुलूस की शुरूआत हुई।
हुसैनी रोड होते वारसी चौक पहुंचा। दरगाह शाह अली मुत्तकी पहुंचकर जुलूस समाप्त हो गया। हजरत अली के जीवन पर प्रकाश डाला गया। मौलानाओं ने कहा कि हजरत अली ने अमन और शांति का संदेश दिया। मुल्क में सलामती की दुआएं की गईं। सलमान संभली, शमशेर अशरफी, मोहम्मद तहाइफ, वसी अहमद वारसी, हाफिज माजिद, राहिल,असद अख्तर, हाजी शाहिद, मोहम्मद उवैस, आबिद अली, मोहम्मद जैद वारसी, रईस अहमद वारसी, वसीम वारसी, मोहम्मद आसिफ अब्दुल खालिक, मोहम्मद सद्दाम आदि रहे।
मोहल्ला मियां सराय में हजरत अली का जन्म दिवस शानो शौकत के साथ मनाया गया। डा. हैदर, डा. नसीम, डा. आबिद, पैकर संभली, मौलाना अजहर नकवी, शवाब हैदर आदि ने मौला अली की शान में कलाम पेश किए। नूरियो सराय, हुसैन खां सराय में अली डे पर महफिल सजी। मौला अली की शान में कलाम पेश किए गए। मौलाना मिसम आदि रहे। सिरसी के मोहल्ला सराय सादक खानकाहे कादरिया चिश्तिया चिश्ती मंजिल में मौला अली की विलादत की खुशी में नजरें मौला ए कायनात कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुफ्ती ए आजम सिरसी आलम रजा खां नूरी ने कहा कि हजरत अली पूरी दुनिया के लिए मानवता और शिक्षा का पैगाम लेकर आए। हम लोगों को तालीम के रास्ते पर चलना चाहिए। इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन अगर कोई है तो वह उसकी जहालत है लिहाजा हम सब लोगों को शिक्षा के मैदान में एक दूसरे का साथ देना चाहिए। कल्लू खां, अखलाक खां, एहसान खां, शाहनवाज खां, अबरार, सालिम, मोहम्मद रफी, सिकंदर चिश्ती, रियासत, उस्मान आदि रहे।