जय महावीर प्रभो, स्वामी जय महावीर प्रभो। कुंडलपुर अवतारी, त्रिशलानंद विभो। भगवान महावीर ने कहा सब प्राणियों से मेरी मैत्री है अर्थात स्थावर या जंगम, दृश्य और अदृश्य सभी जीवों का अस्तित्व स्वीकारने वाला ही पर्यावरण और मानव जाति की रक्षा के बारे में सोच सकता है। मंगलवार को सुबह प्रभात फेरी निकाली गई।
महावीर जयंती के अवसर पर गोपाल मोहल्ला स्थित जैन मंदिर में दिनभर भव्य आयोजन हुए। विद्वानों ने भगवान महावीर को जैन धर्म का संस्थापक माना है। भगवान महावीर जैन धर्म के प्रवर्तक नहीं हैं। वे प्रवर्तमान काल के 24वें तीर्थंकर हैं। भगवान महावीर ने छेदोपस्थानीय चारित्र (पांच महाव्रत, पांच समितियां, तीन गुप्तियां) की व्यवस्था की।
जैन मंदिर में सुबह अनुयायियों ने प्रभात फेरी निकाली। भगवान महावीर का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। मंदिर में उत्साहित श्रद्धालुओं ने नृत्य भी किया। पूरे दिन मंदिर में धार्मिक आयोजन हुए। भगवान महावीर को पालने में झुलाया गया। भजन कीर्तन के बाद विशेष आरती हुई।
डा. प्रमोद कुमार जैन, अजीत जैन, अशोक जैन, आनंद जैन, मोहित जैन, अंकित जैन, लोकेश जैन, पंकज जैन, एके जैन, इंद्रेश जैन, महिमा जैन, ज्योति जैन, प्रेमवती जैन, नीरू जैन मौजूद रहे। पर्यावरणीय प्रदूषण और ग्लोबल वॉर्मिंग के दौर में भगवान महावीर की प्रासंगिकता बढ़ गई है।
भगवान महावीर मानते थे कि जीव और अजीव की सृष्टि में जो अजीव तत्व है अर्थात मिट्टी, जल, अग्नि, वायु और वनस्पति उन सभी में भी जीव है। अत: इनके अस्तित्व को अस्वीकार मत करो। इनके अस्तित्व को अस्वीकार करना अपने अस्तित्व को अस्वीकार करना। स्थावर या जंगम, दृश्य और अदृश्य सभी जीवों का अस्तित्व स्वीकारने वाला ही पर्यावरण और मानव जाति की रक्षा के बारे में सोच सकता है।