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भागवत का श्रवण करने से मनुष्य का जीवन तर जाता है: कथा व्यास

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चंदौसी। श्री सनातन धर्म पंजाबी सभा मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के सातवें दिन कथा व्यास शिव शंकर भारद्वाज ने कृष्ण की अलग-अलग लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मित्रता कैसे निभाई जाए, यह भगवान श्रीकृष्ण सुदामा से समझ सकते हैं।
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कथा सुनाते हुए व्यास ने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के कहने पर अपने मित्र से मिलने द्वारिका पहुंचे। सुदामा ने द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा व महल की ओर बढ़ने लगे, तभी द्वार पर खड़े द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं। इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है और अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से सुदामा का नाम सुना तो प्रभु सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे और सुदामा को अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया। दोनों की ऐसी मित्रता देखकर सभा में बैठे लोग अचंभित हो गए। कृष्ण अपने मित्र सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया और कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया। कथा व्यास ने कहा कि जब-जब भक्तों पर विपदा आती है, तब प्रभु उनका तारण करने अवश्य आते हैं। जो भागवत कथा का श्रवण करता है, उसका जीवन तर जाता है। अंत में आरती के पश्चात प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर सतीश अरोरा, नंद नारंग, अशोक शर्मा, मेवाराम शर्मा, उदय शर्मा, भानू भारद्वाज, चरनजीत लाल आहूजा, आकाश आहूजा, मनोज कठेरिया आदि मौजूद रहे।
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