जिले में ऐसी भी बेटियां हैं जिन्होंने काफी संघर्ष के बाद मुकाम हासिल किया है और अभी भी संघर्ष जारी है। जिससे जिले का नाम रोशन कर सकें। यह खुद संघर्ष करने के साथ ही दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा देने का काम कर रही हैं। छोटे से गांव जनेटा निवासी दिव्यांग साजिदा बी महिलाओं के लिए बड़ी मिसाल हैं। कक्षा छह में पढ़ाई के दौरान पशुओं का चारा काटने वाली मशीन में दोनों हाथ गंवाने के बाद भी जज्बा कम नहीं हुआ। पढ़ाई जारी रखी और सिलाई और कढ़ाई करने में भी महारथ हासिल की। साथ ही दूसरी महिलाओं को सिखाने का काम किया। इसी तरह के अन्य बेटियों ने भी संघर्ष कर कोई न कोई मुकाम हासिल किया है।
- वर्ष 2018 में हड्डी, सींग और लकड़ी के हस्तशिल्प कारोबारी पति का अचानक निधन हो गया था। तब घर और परिवार की ही देखभाल करती थीं। बेटा छोटा था और पति के निधन के बाद कारोबार संभालने की जिम्मेदारी सामने आ गई। गृहिणी के रूप में रहने वाली महिला के सामने कारोबार संभालने की चुनौती आना बड़ी बात थी। हिम्मत की और अपने पति के हड्डी, सींग और लकड़ी के हस्तशिल्प कारोबार को संभाला। शुरुआत में संघर्ष काफी था। लेकिन समय के साथ कारोबार को पूरी तरह संभाल लिया और अब बेटे की देखभाल के साथ कारोबार कर रही हूं। निर्यात भी काफी बढ़ा दिया है। पहले लोग कहते थे कि महिला होकर कारोबार को किस तरह संभालेगी लेकिन अब वही लोग प्रशंसा भी करते हैं।-
पूर्वी वार्ष्णेय
- वर्ष 2008 में कक्षा छह की छात्रा थी। इसी दौरान चारा मशीन से दोनों हाथ खो दिए थे लेकिन पढ़ाई करने का जज्बा कम नहीं हुआ था। एमए और बीएड कर लिया है। प्रतियोगी परीक्षा की भी तैयारी चल रही है। बीए करने के बाद चंदौसी निवासी संगीता भार्गव से मुलाकात हुई थी। उन्होंने मेरे हौसले को कम नहीं होने दिया। उन्होंने मुझे आगे बढ़ने में काफी मदद की है। वह आकांक्षा सोसायटी चलाती हैं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम करती हैं। उनकी सोसायटी की ओर से मैं भी महिलाओं को सिलाई और कढ़ाई सिखाती हूं। मुझे देखकर दूसरी महिलाएं प्रेरित होती हैं यह उदाहरण मेरे सामने आते हैं। मैंने दोनों हाथ गंवाए लेकिन हौसला कम नहीं होने दिया। इसलिए जो महिलाएं अपने सपनों को पूरा करने में पूरी ताकत लगाएं। तभी समाज में बदलाव होगा।-
साजिदा बी, गांव जनेटा
- चंदौसी में मेरी परवरिश हुई और मेरे मामा दिलीप सक्सेना और गुरु वेद कुमार शर्मा ने आगे बढ़ने में सहयोग किया। छोटे से शहर में रहने के बाद भी मेरे सपने बड़े थे। प्रयास में सफलता मिलती रही। कई बड़े मंच पर प्रदर्शन किया है। मुझे सात वर्ष मुंबई में रहते हुए हो गए हैं। शुरुआत में जो संघर्ष था उसमें परिवार का पूरा सहयोग रहा है। मैं यही कहना चाहती हूं कि महिलाओं को जिस क्षेत्र में जाना है उन्हें उस क्षेत्र में जाने से रोकने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है लेकिन इन चुनौतियों से मुकाबला करते हुए आगे बढ़ना है। तभी सफलता मिलती है। महिलाएं समाज में अपनी पहचान अपने दम पर ही बना रही हैं। सभी क्षेत्र में अब महिलाओं का प्रतिनिधित्व लगातार बढ़ रहा है।
-गुल सक्सेना, गायक कलाकार, चंदौसी
- बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए परिवार का सहयोग जरूरी है। मुझे तो पूरे परिवार का सहयोग मिलता है। हालांकि मुझे गायक कलाकार बनना है तो संघर्ष मेरा जारी है। कई बड़े मंच पर प्रदर्शन करने का मौका मिला है। शो भी लगातार करती आ रही हूं। अभी उस मंच की तलाश है जहां पूरा देश सुनेगा। उसके लिए लगातार प्रयास चल रहा है। परिश्रम कठिन होता है तो सफलता भी मिलती है। महिलाएं समाज में अपनी बात को रख नहीं पाती थीं लेकिन अब महिलाओं ने समाज की बंदिशों को तोड़कर आगे बढ़ने का साहस किया है और अब महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास भी होने लगे हैं। महिलाएं समाज को नई दिशा देने का काम करती रही हैं आगे भी करेंगी।-
काजल त्यागी, गायक कलाकार, चंदौसी