रामनगर गांव में हेपेटाइटिस सी कैसे फैला इसकी पड़ताल के लिए स्वास्थ्य विभाग जुट गया है। संक्रमित मिलने वाले मरीजों के साथ गांव के अन्य लोगों को जागरूक किया जाएगा। जिससे हेपेटाइटिस सी का संक्रमण फैलने से रुक सके और लोगों की जिंदगी सुरक्षित हो सके। स्वच्छ पानी की स्थायी व्यवस्था होने तक पानी के टैंकर गांव में सुबह-शाम भेजे जा रहेंगे।
असमोली सीएचसी के प्रभारी डा. मनोज कुमार ने बताया कि हम संक्रमण फैलने की पड़ताल कर रहे हैं। इस गांव में इतनी बड़ी संख्या में लोग हेपेटाइटिस सी के शिकार कैसे हुए हैं। संक्रमण जिन वजह से हो सकता है उनको तलाशा जा रहा है। झोलाछाप चिकित्सकों पर भी कार्रवाई की जाएगी। अंदेशा है कि उन्होंने कभी पुरानी सूई लोगों पर इस्तेमाल की और उससे ही यह बीमारी गांव में पनप गई। इसलिए झोलाछाप पर कार्रवाई की जाएगी। पानी स्वच्छ पीना जरूरी है लेकिन हेपेटाइटिस सी संक्रमित बीमारी है जिससे बचने के लिए जागरूक होना भी जरूरी है।
160 मरीज मिल चुके हैं अब तक
स्वास्थ्य विभाग की ओर से 293 लोगों की जांच कराने पर 160 मरीज मिले थे। उनका उपचार शुरू कर दिया है। अन्य लोगों की जांच के लिए भी नमूने लिए जा रहे हैं। जिससे संक्रमण की स्थिति की जानकारी मिल सके। सीएचसी प्रभारी का कहना है कि किट की जांच में संक्रमित मिल रहे हैं। वायरल लोड भी बाहर की लैब पर चेक कराया जा रहा है। लोगों के लिए दवाई आ चुकी है। लगातार उपचार दिया जा रहा है।
उस्तरे से पहले कराते थे शेव, अब नए ब्लेड का कराते हैं इस्तेमाल
संभल। हेपेटाइटिस सी पुराने ब्लेड से शेव बनाने से भी हो सकती है। यदि संक्रमित व्यक्ति को ब्लेड लग गया और उसी ब्लेड से किसी अन्य व्यक्ति की शेव बनाई गई तो वह संक्रमित हो सकता है। पहले के समय उस्तरे से शेव बनाई जाती थी। अब तो उस्तरे का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। गांव के लोगों ने बताया कि पहले उस्तरे का इस्तेमाल होता था लेकिन अब ब्लेड का इस्तेमाल होता है। इसलिए ब्लेड से संक्रमित होने का अंदेशा कम है।
पांच साल से लोगों को हेपेटाइटिस सी की जानकारी हुई
संभल। रामनगर गांव के लोगों ने बताया कि हमें पांच वर्ष पहले हेपेटाइटिस सी की जानकारी हुई। उससे पहले लोग इतना नहीं जानते थे। अब इस संक्रमण ज्यादा लोगों में फैल गया है। कैसे फैल रहा है। इसकी जानकारी नहीं है। पीला पानी तो नलों से निकल ही रहा है। लोग जो आर्थिक रूप से मजबूत हैं वह बाहर जाकर इलाज करा रहे हैं। जबकि जो कमजोर लोग हैं वह गांव या आसपास ही इलाज कराते हैं।
हम जानकारी करने का प्रयास कर रहे हैं कि बीमारी गांव के लोगों में कैसे फैली है। गांव के लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिससे संक्रमण न फैल सके। झोलाछाप चिकित्सकों पर भी कार्रवाई की जाएगी। अन्य वजह की भी तलाश की जा रही है।
डा. मनोज कुमार, सीएचसी प्रभारी, असमोली।